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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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चन्दायतकी इन प्रतियोंके मिलनेकी बात ज्ञात होनेपर राघव सारस्वतका ध्यान अपनी उस प्रतिकी ओर गया जो उनके पास बीसो बरससे पड़ी थी और जिसे धीरेन्द्र वर्माने अप्रमाणित घोषित कर दिया था। उन्होंने तत्काल अपने उस ग्रन्थका परिचय सरसम प्रकाशित कराया और उसका एक प्रति-मुद्रण मुझे भेजा। चन्दायतके सम्पादनकी इच्छा प्रकट करते हुए उन्होंने यह भी सूचित किया कि बम्बईवाली प्रतिका मेरा पाठ उन्हें कहींसे प्राप्त हो गया है और वे मुझसे तत्सम्बन्धी अन्य आव- श्यक जानकारी चाहते हैं। शालीनताकी इस प्रकार उपेक्षा देखकर मेरा चौंक उठना स्वाभाविक था। मैं क्षुब्ध हो गया। मोतीचंदजीको भी ये बातें अच्छी न लगीं। उन्होंने भी सलाह दी कि मैं अपना पाठ शीघ्रतिशीघ्र प्रकाशित कर दूँ। फलतः मैंने पुनः चन्दायतके सम्पादनमे हाथ लगाया। उसके लिए सामग्री जुटाते समय जब कमल कुलश्रेष्ठके शोध निबंध हिन्दी प्रेमाख्यानक काव्यको उलट रहा था, उस समय मेरा ध्यान उनके इस कथनकी ओर गया कि गार्सा द तासीने अपनी पुस्तक हिस्तोरे द ला लितरेत्योर हिन्दुई पत हिन्दुस्तानीमें लौरक चन्दाकी कुछ अप्राप्य प्रतियोंका उल्लेख किया है। यह कथन मुझे कुछ आश्चर्यजनक साथ ही महत्वपूर्ण जान पड़ा। मैंने तत्काल उक्त ग्रन्थका लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय द्वारा प्रस्तुत अनुवाद हिन्दुई साहित्यका इतिहास देखा पर उसमें ऐसी कोई बात मुझे न मिल सकी जिससे कमल कुलश्रेष्ठके कथनका समर्थन हो सके। यह बात नहीं कि कुलश्रेष्ठने गलत सूचना प्रस्तुत की है वरन् वार्ष्णेयने अनुवाद करनेमे स्वेच्छा-नीति बरती है। जो अंश उन्हें अनावश्यक जान पड़े उन्हें उन्होंने छोड़ दिया है। ऐसे आकर ग्रन्थोंके अनुवादमें, जो मूलमें दुष्प्राप्य हों स्वेच्छाका प्रयोग किस प्रकार घातक सिद्ध हो सकता है, यह स्पष्ट सामने आया। मेरे लिए आवश्यक हो गया कि मूल ग्रन्थ देखूँ। तासीके उक्त ग्रन्थके दो संस्करण प्रकाशित हुए थे। एक तो १८४० और १८४७ के बीच और दूसरा १८७०-७१ ई० में। दूसरे संस्करणमे लेखकने काफी परिवर्तन किया है। पहले संस्करणको उलटनेपर जो कुछ मिला उसका अंग्रेजी रूप इस प्रकार है:-- रोमान्स-(दि) आव लौरक एण्ड चुरक आर द फेरी टेल्स आव द सेक- ल कार्डो-चारल्ड मैनुस्क्रिप्ट बिच मेनी कलर्ड डेकोरेझन्स। दिस मैनुस्क्रिप्ट इस रिटेन इन पिक्युलियर पर्शीयन कैरेक्टर्स। इट बिलाग्ज टु द रिच कलेक्शन आव द क्युक आव सस्पेक्ट अफिस आफ हर मजेस्टी द क्वीन आव ग्रेट ब्रिटेन।१ अर्थात्—लौरक और चुरककी प्रेम कथा अथवा फेरिन स्पिरिट परीमहल—एक चीथड़ा हस्तलिखित ग्रन्थ, जिसमें अनेक रंगीन अलंकरण हैं। यह हस्तलिखित ग्रन्थ विचित्र ढंगके पारसी लिपिमें लिखा हुआ है। यह ब्रिटेनकी महारानीके चचा क्युक आव ससेक्सके मूल्यवान संग्रहमें है। १ ग्रन्थ १ पृ ५२६