चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१८ २७७ ( रौड्स २२१ ) - पुरसीदने महरि बर गुलफ़रोश राज व बाज नमूदने गुलफ़रोश हवाले चाँद ( महरिका मालिनसे पूछना और मालिनका चाँदकी शिकायत करना ) महरि कहा सुन मालिन माइ । अइस तैं सुना तइस कहु आई ॥१ फाल्हि सो चाँद देउ घर गई । देउ दुआर बितारन मई ॥२ चार सुघन जग जातहिं जापा । कुछ आपन औ बहुत परापा ॥३ चाँद न आछी अपनैं बानी । बिन पानी अति सीम सुखानी ॥४ घर घर भात दस मदिराई । फारिकदयी मुँह निकर न जाई ॥५ सों राजा के धिय सो, चाँदा कैसें लोक हँसावसि ॥६ औ जो पुरखा सात गये सरग, तैं तिहँ लुआवसि ॥७ टिप्पणी—(२) फाल्हि—कल । बितारन—वितण्डा । (३) जातहिं—यात्राके निमित्त । आपन—अपने स्वरूप । (५) फारिक—फारिग़ फ़ारिग्मा । २७८ ( रौड्स २२२ ) शर्मिन्दा शुदने महरि पूरा अज इंतामे चाँदा ( चाँदकी बदनामी पर फूल महरिका लज्जित होना ) सुनतहि फूला महरि लजानी । पर सहब जनु मेला पानी ॥१ जम तुमार पुरउँ दह दही । सम होइ महरि भात सुन रही ॥२ काँन भाँत पर गयइ भुलाई । इहँ कुरपारन लागि गँवाई ॥३ काहे करैं विष तँ भातारी । बहु आँगरस मरतेउँ पारी ॥४ अस आरदन दुनि कहुँ भइँ । जहाँ पियाही तिहि कय फइँ ॥५ दाइ कुरपारन, अगरण लाग हँसाजनहार ।६ भातैं लाग कह मालिन, डगरी आइ छिनार ॥७