भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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३८१ २८७ (सदा १४४८)

    • न दिलन का पौटा (विरहका और के रूप क्रम) पिरख नारि भा समुझाइ । गोद जीउ पेन पँहुचि सिरिआइ ॥१ चन्दन अमिर पिम मन मारा । परसि गपा भरि भीम गुँभारा ॥२ सिन्धु माँग नग साउर टीको। पग पान मुख पीग दीको ॥३ अछन पहिरि भउ गिय हार । हाथहि मेहँदी हिंया सिंगारु ॥४ अपर रूपे मदन भइ । भए लागि मानिन पर गइ ॥ उमगह नहगह निसि पायी, गरुह जा भाउ निहग ॥६ पउज मय पान फूलउ, भयी दुरँग दुरग ॥७ [टि०-] (१) म०नि० पृ० ६५१ । २८८ (संवत् १४४९)
    • न लउतन्ह दिलन को प०८ ख (दिल्हन के भँवर के रूप क्रम के ० ख०) दिन का विरह भा तुयानी । भा उधारा पँचौ गनी ॥१ भए तेवँइ सिखा परा। गए सोइ मानिन घर आए ॥ सेंधुरा भा कंचु सुधार । विरख करै। गुयन निहार ॥३ विरहन दून भए पर भार । आग भइ पनि साही मार ॥४ आग्य बरइ न बुझावइ । तँह अगन भए अंगल जरइ॥ भए घरा सउर पुनि मँदा । सब जन पाइ रह खंदा ॥६ भए दिलन विरह उन सुखभन्ह कइ ।७