चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 275, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें१४२ २८९ ( रोहीन्गुस १२३ : मनेर ३४५क ) रफ्तने लोरक दर खानये झुन्नारदार व पुरसीदने बख्ती खांद ( बाह्मणके घर जाकर लोरकका यात्राकी साइत पूछना ) रैन खेलानों भा भिनसारा । पंडितकें १ घर लोर सिधारा ॥१ पैंभरी साइके आपु बनावा २ । पाटा पान बीर कइँ ३ आवा ॥२ पाट पँसारै ४ दीन्हि असीसा । चँदर पातं ५ सूरुज मुख द[ीसा*] ६ ॥ फिरूँ चेत परमां ७ परफासू । पैंपरि पूजे कीन्हि ८ इम पासू ॥४ काइ मया हमफहिं चित घरी । मई अजोर अइस हमरी भरी ॥५ कहु जजमान सो कारन, किंह इहवाँ तुम आयहु १० ।६ चँदर जोत मुख अदबल, किंह लग चित उचायहु ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दस्तान रफ्तने लोरक बरे नक्शूथे पुरसीदन ख श (लोरकका ज्योतिषीके पास जाकर पूछना) । १—रैन गोलि के । २—ते । ३—सांथों पडित जाइ अगवावा । ४—पे । ५—पैसार पुनि । ६—चँदर भाव सुरज पैंह दीक्षा । ७—काइ फेरु चित म्वा । ८—सुरप ओ (?) कोन्हा । ९—भाई उजियार फीर के मन्वी । १०—किह सग ईहवाँ आयहु । २९० ( रोहीन्गुस ५३ मनेर ३४५व ) गुफ्तने झुम्नारदार बख्ती नीक व साभती नूह ( ब्राह्मणका शुभ घड़ी बताना ) सुरुज कड़ा में चाँद पुराउप । सगुन पाँच दै पुरुष चलाउप ॥१ परी माँड के राहि गुनाये । सबही निभिर्य पण्डित पाये ॥२ गोर गुनित तुम तोरफ आनहु । कहउँ बोल सो सच कर मानहु १ ॥३ दिन दस तुम्ह कहँ पाट चलावहुँ । पुन इहँ पन्थ भला निधि पावहुँ ॥४ एक दोइ गाइ मैं कुछ देखेउँ । आग होइ पै नाहीं सेखेउँ ॥५