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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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क्रय किया था। पश्चात् उक्त पुस्तक विक्रेताने उस संग्रहके हस्तलिखित ग्रन्थोंको फारसीके सुप्रसिद्ध विद्वान् नथेनियल ब्लान्दके हाथ बेचा। आगे खोज करनेपर ज्ञात हुआ कि नथेनियल ब्लान्दने जो हस्तलिखित ग्रन्थ संग्रह किये थे, उन्हें १८६६ ई. में लार्ड आग क्राफर्डने क्रय किया था और वे उनके बिब्लियोथेका लिण्डेसियाना नामक निजी पुस्तकालयमें रखे गये थे। आगे खोज करनेपर पता चला कि १९०१ ई. में क्राफर्ड संग्रहको मैनचेस्टरके जान रीलेण्ड्स पुस्तकालयने क्रय किया था। जब मैंने रीलेण्ड्स पुस्तकालयसे पूछताछ की तो उन्होंने क्राफर्ड संग्रह क्रय करनेकी बात स्वीकार करते हुए सूचना दी कि उपयुक्त ग्रन्थ उनके संग्रहमें मौजूद है। तत्काल मैंने उनसे उक्त ग्रन्थका माइक्रोफिल्म देनेका अनुरोध किया। माइक्रोफिल्म आनेपर ज्ञात हुआ कि मेरा अनुमान सर्वथा सत्य था। उक्त ग्रन्थ वस्तुतः चन्दायना ही है। इस प्रकार मेरे हाथ चन्दायना की एक बहुत बड़ी प्रति आयी और मैं उस प्रतिके पाठोद्धारमें जुट गया। इस नयी प्रतिकार पाठोद्धार चल ही रहा था कि डब्लू० वी० आर्चर द्वारा सम्पादित इण्डियन मिनियेचर नामक भारतीय चित्रोंका विद्याभार प्रकाशमें आया। उसमें उन्होंने मैसाचुसेट्स (अमेरिका) निवासी फ्रैंसिस होफरके संग्रहसे एक चित्र प्रकाशित किया है।१ उसे उन्होंने बम्बई प्रतिके चित्रोंकी शैलीका बताया था। इस सूत्रसे चन्दायनाके कुछ और पृष्ठ प्राप्त होनेकी सम्भावना सामने आयी और मैं उन्हें भी प्राप्त करनेकी ओर प्रयत्नशील हुआ फलतः उक्त संग्रहसे इस काव्यके दो पृष्ठ हाथ आये। इस प्रकार कुछ बरसों पूर्वतक जो चन्दायना हिन्दी साहित्यके इतिहासमें केवल नाम रूपमें जीवित था, उसके सम्बन्धकी पर्याप्त सामग्री एकत्र हो गयी। मैंने उसके सम्पादनका कार्य नये सिरेसे आरम्भ किया और परिणाम-स्वरूप यह ग्रन्थ अब आपके सामने है। उपलब्ध सामग्रीके आधारपर चन्दायनाको अपने पूर्णरूपमें प्रस्तुत करना तो सम्भव नहीं हो सका फिर भी उसका एक बहुत बड़ा अंश सामने आ गया। अभी उसके आदि और अन्तके कुछ अंश अनुपलब्ध हैं और बीचमें यत्रतत्र कुछ पृष्ठोंका अभाव है। यदि रावत सारस्वतवाली प्रतिकतक मेरी पहुँच हो सकती तो सम्भवतः आदि और मध्यके अंशोंकी पूर्ति कर पाता यद्यपि उसका पाठ अत्यन्त विकृत है। सुनता हूँ वे उस प्रकाशित कर रहे हैं। यदि वह प्रति कभी प्रकाशमें आ सकी तो यह कमी पूरी हो जायगी; पर अन्तिम अंशकी पूर्ति तभी सम्भव है जब कोई नयी प्रति उपलब्ध हो। प्रस्तुत प्रबन्ध ग्रन्थकी उपलब्ध सामग्रीको फारसी लिपिसे नागरीअक्षरोंमें प्रस्तुत कर उन्हें क्रमबद्ध कर देने तक ही सीमित है। किन्तु अकेला यह काम भी कितना कठिन है इसका अनुभव वही कर सकते हैं जिन्हें इस कार्यका व्यावहारिक अनुभव है। १ इंडियन मिनियेचर्स ऑन्थोलोजी ...