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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१४८ बारह मंदिर रैन अँधावसिं¹। सुरुज सेज उजियारी राखसि ॥४ तज सोफ आ रहु तुमाइ । फड़इँ मात तूं खिन न [स*]बाई ॥५ दान सुरुग कर निरमल, लोरक भाइ हमार ।६ तारै नीलञ्ज अमावस, फरि जो लिन्हि अँधियारं॥७ मूलपाठ—(१) मुग कारी मुग निसि । पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—मलामत कर्दने कँवर चाँदा रा (कँवरका चाँदको मलाना करना) । १—घर उतारि । २—मुगकारी पतराहि तिह बुझारी । ३—पास पास दिन होइ । ४—रहनि नहिं चाँदा । ५—अस निह होइ गांयर वै बाई । ६—रैन मूँ बाजसि । ७—अँधियारै राखसि । /—तब जो सोक मईह रजाइ । —मन होइ तो मरे रजाइं । १ —मूँ ता मनै अस निरुञ्ज, अमावस वै अँधियार । टिप्पणी—(१) इसीं—थी । (१) रूप—ऐसा । २९८ (रैकीयूस ३३३) विदान कर्दने लोरक बा कुँवर व पेश्तर रफ्तन ( लोरकका कुँवरको विदा कर आगे बढ़ना ) धरि कँवरू लोरक कँठलावा । नैन नीर भरि गाँग बहावा ॥१ केस छोर कँवरू पाँयन परा । बिरह दगध पाथर धनु ररा ॥२ देखतहिं चाँदा चितहिं सैंखानी । मङ्गु न लोर छोड़ै लोरकानी ॥३ कातिक मास रोतु रितु गाइ । हम पुनि कँवरू खेलत आइ ॥४ ठाढ़े कँवरू सिर दइ हाथा । जान देइ चाँद संघाता ॥५ गाउ खोलिन आ मैनाँ, कहु सँदेस अस जाइ ।६ बहर जान न पावइ माँजरि, रहे खोलिन के पाइ ॥७ टिप्पणी—(१) कँठलावा—गले लगाया । (२) पाथर—पाथर । ररा—चिरकाया ।