चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४९ (३) संभाषी—शंकित हूँ । (५) ढाहे—नष्ट । २९९ (रीडिंग्स १३७) रवान शुदने लोरक व चाँदा बशिताम (तेज़ी से लोरक और चाँदा जाना) चले दोउ सुइँ पाडैं न धरहीं। पेग बेग उताबर मरहीं ॥१ चला लोर मिलि चाँदा आई। खोलिन मैना बिसरी माई ॥२ चाँदहि देखि लोरकहि कहा। कैंसैं सो मिलत जो चित अहा ॥३ औ अस कहा मइँ तूँ लोरा। नीके मन चित करिहूँ मोरा ॥४ तोर सनेह छाड़ेउँ घर बारू। कै बोरहु कै लावहु पारू ॥५ साँझ परी दिन अँथवइ, लोरक चाँदा दोइ ।६ औघट घाट गाँग कै, रहे निरिउ तर सोइ ॥७ टिप्पणी—(५) बोरहु—डुबा दो। (७) तर—नीचे। ३००-३०३ (अनुपलब्ध) ३०४ (रीडिंग्स १३५; मनेर १५३अ) रसीदने लोरक व चाँदा बरे गंगा व इशारत कर्दने चाँदा मल्लाह रा (लोरुक और चाँदा का गंगा के किनारे पहुँचना और चाँदा का मल्लाह को संकेत करना) गाँग सरिम भभासम करनों¹। सारफ जाइ लेव² एक छरनों ॥१ चाँदा फिर फिर³ आपु दरशारा। मदु गवट मोहि दरसत आपा ॥२ मँरगा टाँउ जो गवट आवा। फर फगन भाँदि झनकाया³ ॥३ गरर दरउ अगम्भे रहा। तिरिया एक अस्तरै⁴ अहा ॥४