चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 283, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें२५ कहै नाउ बैठु' देखउँ आइ । फटन तिरी यह ईंहवाँ आई ॥५ सँरगा बेग पलावसि, खिन खिन फिरैहि सँकाइ'' ।६ काइ कहें कस पूँछँ', कइसे ईंहाँ आइ ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान नमूने चाँदा दस्ताने मल्लाह रा (मल्लाहको चाँदाका हाय दिगराना) १—गग खरित औरय करना । २—सोरफ गैन्द आइ । ३—फिर फिर चाँदा । ४—सोइ बेगी महु केवट आवर । ५—सँरगा तौर ओ केवट आवा । ६—चमैकावा । ७—केवट बैठ अचम्मो पा । ८—अकेली । ९—से । १०—कौन नार कहँवा हुत आइ । ११— सकार । १२—काइ कहीं केउँ पूँछउँ । ३०५ ( रीकेन्हम २३४ : मनेर १५२८ ) आशिक शुदने मल्लाह बज दीदने जमाले सूरते चाँदा ( चाँदाका सौन्दर्य देखकर मल्लाहका मुग्ध होना ) खेवट' देख बिमोहा रूप । अमरन बहुत' सुनारि सरूप ॥१ दई विधाता' पूजई आसा । जस सिरिया ओ आवइ पासा ॥२ खेवट कहा उतर दिस जाइ । बैसि सरगा नाउ रुधाइ ॥३ चाँदा नारि उतावर चली । खेवट कहा रात है भली ॥४ गई फोंद यहँ सोरफ रहा। खेवट सँरगा बैस एक अहा ॥५ गुन बाँधी यह खेवट, सँरगा फेरी आइ ।६ लेके पार उतारों सो धनि, नौलहि लोगहिं आइ ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रतिमें इस कड़वककी केवल आरम्भिक तीन पंक्तियाँ हैं। शेष पंक्तियाँ कड़वक ३०७ की हैं। शीर्षक—दास्तान मुफ़तार शुदने केवट बज दीदने ऊ (उसे देख कर मल्लाहका प्रेमासक्त होना) १—केवट । २—बहुत । ३—तुम्हार । ४—कहा नाउ परबैतैं ब्यहु । ५—लेंबर ।