चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५६ (५) चोरेउँ—पोहेँ। काढेउँ—काढ़ेँ। मूँड—सिर मुष्ठरण— मुण्डण्ड । तोरेउँ—तोड़ेँ । (७) फाँक—मुकीला (देखिये टिप्पणी ११९।५) । ३१४ ( रीकॅण्ड्स २४४ : मनेर १५७ब ) फह्मादने पाबा लोरक रा व अन्दाख्तने बाबन तीरे सुवम (चाँदका लोरकको सचेत करना और बाबनका तीसरा तीर छोड़ना ) चाँद कहा अब देउर लीजइ । गाड़े आँखद ढील न दीजइ ॥१¹ दू सर गये रहा अब एकउ । लोर² पीर कँसौ के टेकउ ॥२ सर मेठसि कस निभर नँ आवइ । जो आवइ तो जीव गँवावइ ॥३ आइ देउल महँ सोर सँभारा । नाँघसि बान उठा झनकारा ॥४ बाबन बान छूटा आइ⁸ । मारसि देउर गयउ उड़ाइ ॥५ पर बाबन कर भागा, चाँद कहा विचार ।६ बँधवा सुरुज बहुरि परगासा, आनइ सम ससार⁹ ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान चाँद गुफ्तने पनाह देवर पैकर आए लोरक (चाँदका लोरकको देवरका सहारा लेनेको कहना) १—दी० अधीजइ । २—दोइ । ३—मीरक । ४—बह हर दे० पुनि निपर न भावइ । ५—नाचे अधउर जो बान रुषारु । गरया देउर उड़ा झनकारू ॥ ६—बाबन तबही धनुष बजार । ७—कर महा चार । ८—विधार बिचार । —अधवा मुत्र सुरुज परगासा । ९ —सतार । टिप्पणी—(१) देउर —देवर, मन्दिर । गाड़ —कठिन । आँखइ—समय । ( ) कँसौ—किसी प्रकार । (३) निबर—निकट । नैं—नही । (४) देउल—देवल, मन्दिर ।