भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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तुम्हारे । ६—उपत । ७—अस देखिउँ अस मैंक आपतँ । दपीका ढिला हुत सो पायतं ॥ ८—बावन कहाँ सुनहु तूं मोर । ९—मने सो कुंकुद मोर ॥ टिप्पणी—(१) काइ लागि—किस लिए । कीन्हि—किया । (२) पहिं—पास । आही—थी । (३) पिरम—प्रेम । कार—काल । राता—रक्त यहाँ तात्पर्य गारेसे है । ३१३ ( रोलैण्ड्स २७३ ; मनेर १५५अ ) जवाब दादने बावन चौंदा व अन्दाख्तन तीरे दुअममुरु ( बावनका चाँदेको उत्तर देना और दूसरा तीर छोड़ना ) अहि¹ पापिन तिहिका मारों । नाक काटि कै² देस निसारौं ॥१ तिहि अस तिरि गोवरौं³ घसि लेई । पात फइस अस ऊतर देई ॥२ कस लोरक⁴ सेतें मोहि डरावई⁵ । तू बड़बोल जान जो पावइ ॥३ तिहि लग लोरक जी गँवाइह । भेंट मई अब जान न पाइह ॥४ पुरुष मार ओडन मदिं¹¹ फोरउँ । काटउँ मूँड़ भुजादण्ड तोरउँ ॥५ अस सुन लोरक (सिंघ) कोपा, ओडन ढाँढ सँभार¹² ॥६ बावन एक फॉक सर छोड़ा, गयउ भिरिख सो फार ¹³ ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान जवाब गुफ्तने बावन बा चाँदा (चाँदको बावनका उत्तर) । १—अरी । २—तिहि । ३—गावा ('र' लिखनेसे छूट गया प्रतीत होता है) । ४—अन । —शेर । ५—डरपावति । ७—तू पै बाल आइ जन पावति । ८—गँवावा । ९—भइ भट । १०—पावा । ११— सँठ । १२—अस सुनि लोरक सिंघ अस गावा कर ओन्न सँभार । १३—बावन एन चाहि सर छोड़ा अगराई तीर सभार ॥ मूलपाठ—(१) सिग । टिप्पणी—(१) तिहि—तुझको । निसारौं—निकालूँ । (३) बड़बोल—लम्बी लम्बी बातें करनेवाली; बातूनी ।