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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२६४ इस प्रतिमें पंक्तियों ५ और ३ क्रमशः ३ ओर २ हैं और पंक्ति २ के पद पीछे-आगे हैं। १-आबइ डाँत कपाय। । २-पाछेँ फिरि ब्वो लोरक हेरा। बावन मार वाफ (वाप) कस फेरा। ३-मुँह फिराइ लोर सँत कहा। बह देखु बावन आवत बाहा। ४--बाकन। ५-आअत आवत। ६-ब्वोह लोरक। ७-ओ लोरक बाँह। ८-ऊँचा बिरिल मुहाजन लोरक रीनाहि छाँह। टिप्पणी-(१) पाछा-देर। (२) बाछें-पीछे। हेरा-देखा। (५) आपठ हुतें-भात ही आते आते। ओहन-डाक। देखा-पीठ हटाया। (६) बाँह-बाप। (७) अम्ब-आम। आउ-आवर। भा-(भूतकालिक क्रिया) हुआ। ३१२ (रीडिंग्स २७९। मनेर १५७ब ) गुफ्तने चाँदा बर बावन रा (बावनसे चाँदा कहना) पावन कहि गौं चाँद कुंवारी। काइ लागि तुम्ह कीन्हि गुहारी ॥१ माइ बाप जो दीन्हि बियाही। बरस देबस हौं तुम्ह पहिं आही' ॥२ पिरम कहा न कीन्हि न बाता। तुहँ न देखउँ फार कि राता ॥३ सुपन गुनौँ हुत तुम्हारा नाऊँ। तरसि सुपउँ पै सेज न पायऊँ ॥४ जस आपठँ तस मके गयउँ। दयी क लिखा सो मैं पयेउँ' ॥५ बहुरि जाहु घर अपने, बावन मंग सभ मोर ।६ राउ रूपचन्द बाँठा मारा, आइ मो कइँ लार' ॥७ पाठान्तर-मनेर प्रति- शीर्षक-दास्तान हुम्बार्य चाँद ब लोरक दरीदने बावन ब गुफ्तने चाँदा बावन रा बेहुजुरी लोरक (चाँदाका चाँद और लोरकका पौम करना और चांदका बावनसे लोरककी प्रशंसा करना)। इस प्रति में पंक्ति ३ और ४ क्रमश ४ और ३ हैं। १- बावन सन कहि । २-मुँ कहसि। ३-बरस दवस तुम्हरी आही। ४-पिरम कहा नह कही ना बाता। दिह न देख कार कि राता। -