चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६३ साँस मार पायन तस धावा । मार बिपारतैं बान न पावा ॥३ बात' गोषार धरावइ गायी । अपने करी सो धाइ परायी ॥४ खेदै जेठैं पावइ पावइ खोजू' । इहँ परिहँस तो रही न रोजू ॥५ भै रे चलहिं यह धावइ, मिला कोस दस जाइ ।६ ऊँचा धिरिख सुहाबन एक हुत, लोरह लीन्हों आइ' ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान हुम्बाक्य पौदा व लोरक दवीदने बावन (बावनका पाँव और लोरकका पीछा करना) १—कर । २—करक । ३—तोग्हि लोरक कोस दोइ गयऊ । ४— गाइ । ५—आसन (?) । ६—बाठ बठ पाउ न पावइ गाजू । ७— रहें परिहँस रहे न रोजू । ८—यह र चले। ९—ऊँचा धेय सुहावन, लोरक लीन्हों आइ । ३१० (अनुपलब्ध) ३११ (रीड्स २४१ : मनेर १५४अ ) खबर कर्दने पौदा बावन भी आमद व आमदने बावन (पौदका बावनके आनेकी सूचना देना और बावनका आ पहुँचना ) चाँदइ देखा पावन आवा । बचन न आवइ धाफे पावा' ॥१ बावन आइ बाघ जस घेरा । फिरि जो चाँदहूँ पाछों हेरा' ॥२ मुख फिराइ लोर सों कहा । अब देखहु पायन आवत अहा' । ३ धनुक चढ़ाइ बान कर गहा । तस मारौं जस देह न रहा ॥४ भाषत हुतं' बावन सर मेला । सो सर लोरक' ओडन टला ॥५ आठन फुटि लिहावट फुटा, अउ लोरक ग पाँह ।६ पग पिरिख भम्प कर, लोरक भाऊ भा तिह छाँह ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान सभीदने पौद अज आमदने बावन (बावनका आना देख पौदका भयभीत होना) ।