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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१५९ १—बाँद जर आइ सैरगहि भवे। २—अति सरूप सर में गये। ३—केवट उतर बकर पावहि गहा। ४—करथा (यह केवल गुप्तोंकी भूल है। ५—आपुन। ६—आगे। ७—पाऊँ। ८—साँग तब ऊपर, बूहल पावो। ३०८ (रीसेंग्स १३९ : मनेर १५३ख) आमदने बामन बर किनारे गंगा व पुरसीदन मस्काह रा (गंगाके किनारे आकर बामनका मस्काह से पूछना) साँलहि पावन आइ तुलानों। पूछा केवट पिरम मुलानों ॥१ फेरी फेर मोर दुइ आये¹। इँह मारग तिहिँ देखी पाये² ॥२ सुन केषट मुख देखत हँसा³। कुँवर कुँवरी इक इँहवाँ बसा ॥३ पुरुख तुफ्रान तिरी दिखरावा। हाँ रंगराता तिहिकेँ⁴ आवा ॥४ नहिँ राजा नहिँ रानी जानी। कहुँ साथ तिहि जानु न पछानी ॥५ उहूँ नाव ले डाड़े लाये, ऊ फिर फेर न होइ ।६ बामन देख दौर धस लीन्हे, इहँ फिरैँ रोइ⁷ ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान आमदने बामन धीरे बाँद मे रसीदन (बाँदके पीछे बामनका आ पहुँचना)। १—फेरा फेरि मोरे दोइ। २—इहँ मारग हैं देती कोई। ३—सुनके पवट मुख देख हँसा। ४—कुँवरि कुँवरा। ५—तिरिया। ६—रंगराची तिहफै। ७—भल रसन्त बिचक्रसन सांड। उन गतरी पुरुप औ जाइ॥ ८—उह देगु भैरगा ल्वाय तीपई उई न ओगी फेर। — बामन दौरि ऊभ पल कीन्हें, बहुत गै तिह नेर॥ ३०९ (रीसेंग्स २४ : मनेर १५३ख) दर रग उफ़ादन बामन व कुम्हाते तरफ करन (बामनका गंगामें कूदकर लोरकका पीछा करना) धनुरु बान पावन मर पग। तारफ़ दरि गाँग महँ परा ॥१ जउतहि पारन पार न भयऊ। हालहि लार काम छ गयऊ¹ ॥२

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