चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५८ ३१६ (रीडिंग्स २४६। मनेर १५६अ) अनदास्तने बाबन कमान व अफसोस कदन (बावनका धनुष फेंककर खेद प्रकट करना) बावन धनुफ सो दीन्ह उडारी¹। बारह बरीख बसी में नारी ॥१ इम³ माना धनुकाहि⁴ सिधि पाई। बान भरोसे जोइ गँवाई ॥२ धस लैं हौं गाँग परउँ⁵। बूडि मरउँ कै फूँकर म परउँ ॥३ अब हूँ धनुफ हाथ कस करउँ⁷। परु कंठसाय कुतारा परउँ ॥४ पर यहँ आँखि न देखत आई। लहगा सुरुझ चाँद भुलाई' ॥५ जो यह मोरी बार दियाही, माइ दीन्ह अउ बाप'' ।६ राज करो जप लोरक, चाँदहि खाइइ साँप'' ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान अन्दाख्तने बाबन तीरो कमाने खुदरा बर ज़मीं जद (बावनका धनुष-बाण भूमिपर फेंक देना)। इस प्रतिमे पंक्तियाँ ३, ४, ५ क्रमशः ५, ३, ४ हैं। १—जो दीन्ह उठारी। २—मै। ३—धनुष। ४—बान भरोसे तियै। ५—के धँस कें गंग महँ परउँ। ६—बूड़त मरउँ निकरि मन् मरउँ। ७—बरु कंठ मार कुठारी मरउँ। ८—पर यह रोख न देखउँ काई। ९—लेइगा लोरक चाँद पराही। १०—मोर। ११—लेगा करियो जरिया साँप। १२—लोर फिर एक सुरझा दिया भौरउ परा रून्धाथ। टिप्पणी—(१) बरीख—वर्ष। (२) जोइ—स्त्री पत्नी। ३१७ (रीडिंग्स २४७) बाज गुफ्तन बावन व गुजारात कर्दने लोरक व चाँदा बा विदा (१) (बावनका लौटना लोरक और चाँदासे विदा (?) की भेंट) बावन फिरि गोबर दिसि गये। लोर चाँद दोइ आगेँ भये ॥१ गइ करंका विदा दानी। माँग दान अहस अग न जानी ॥२