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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२५९ पान दिखावहि लीन्ह न सोई। पुरुख माँग के माँगी जोई ॥३ अस दान जग काऊ न लिया। कहि तइस जो काठ न दिया ॥४ देस देसन्तर मानुस जाइ। महरी अस बाप औ माई ॥५ ठौर ठौर जो मनुसें इहँ महँ, एक एक लेहिं ।६ घर महँ लोग सूखें मरहिं, बाहर पाठ न देंहि ॥७ ३१८ ( मनेर १५०ख ) दास्तान रवान शुदने बावन तरफ़े खानये खुद ( बावनका अपने घर लौटना ) भपर आइ राइ गुहरावा। कउतुक एक घोर दिखरावा ॥१ तिरिया एक ओ दधी उछारी। सरग हुतें जनु आछरि आई ॥२ इसी तिरिया कितहूँ नहि देखेउँ। चाँद तरायीं एक न लेखेउँ ॥३ पुरुख एक अहें जहि पासा। देखत दुहु कहूँ गयी भुर सासाँ ॥ और पिटार सब सोने भरा। अइस न जानउँ किह कँह धरा ॥५ चलहु राउ वहि मारि के, सूछे अबरइ जाइ ।६ घरहिं माझ होइ उजिआरा, अस तिरिया जो आइ ॥७ टिप्पणी—कडवकका शीर्षक विषयसे से सम्बन्ध नहीं रखता। ऐसा बान पड़ता है कि लिपिक उससे सम्बद्ध कडवक लिखना छोड़ गया है। ३१९ ( मनेर १५०ख ) दास्तान बाज गुश्तेन शुदन व आमदने राज गँगेव बर लोरक ( राज गँगेवका तैयार होकर लोरकके पास आना ) पहिल लोरक राइ घर आवा। फिर गँगेउ गइ होइ आवा ॥१ चाँद लेउँ ताहि सरग चलावउँ। सरग तरायीं माँझ यमावउँ ॥२ कहा सार तुम्ह खाँड मँभारहु। मुहि मेंड गँगेउ तुम्ह न पागुहु ॥३ एक खाँड लरिक तम लावा। फिर फाट तावर महँ आवा ॥४