चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५ मूलतक जाना आवश्यक है। इस ग्रन्थमें आये हुए शब्दोंके मूलमें एक ओर संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश है तो दूसरी ओर अरबी और फारसी। अतः यह कार्य इन भाषाओंके कोशोंके बीच बैठकर ही किया जा सकता है। इस प्रकारके कार्यकी प्रगति सदैव मन्द ही होगी। दुर्भाग्यसे इन दिनों इस कार्यको हाथमें लेनेके निमित्त मेरे पास समयका अभाव है और मेरे मित्रों और हितैषियोंको इतना धैर्य नहीं है कि वे कुछ समय तक इसके लिए रुक सकें। उनका निरन्तर तकावा है कि मूल ग्रन्थ शीघ्रसे शीघ्र प्रकाशमें आना ही चाहिये। अतः इस कामको भी अगले संस्करण तकके लिए स्थगित कर देना पड़ रहा है। जिन शब्दोंके टीप मैंने ले लिये हैं, उन्हें ही देकर सन्तोष मानता हूँ। अन्तमें यह भी निसंकोच कह देना चाहता हूँ कि हिन्दी साहित्य मेरा अपना विषय नहीं है। मध्यकालीन हिन्दी कवियों और उनके काव्योंसे मेरा परिचय नहींके बराबर है। साहित्यके क्षेत्र में प्रवेश करनेका दुस्साहस सदैव मैंने अपने पुरातत्व और इतिहास प्रेम के माध्यमसे ही किया है। पुरातत्त्वकी शोध-बुद्धि ही मुझे चन्दायानके निकट खींच लायी है और यह ग्रन्थ आपके सम्मुख उपस्थित करनेकी धृष्टता कर रहा हूँ। यदि इसमें कहीं कोई कमी और त्रुटि जान पड़ तो उसे मेरी असमर्थता समझकर पाठकवृन्द क्षमा करें। इस दुर्बलताके बावजूद, ग्रन्थको प्रस्तुत करते हुए मैं गौरवका अनुभव करता हूँ। हिन्दी साहित्यके इतिहासकी दृष्टिसे चन्दायानका अपना मूल्य और महत्व है; उसका प्रकाशमें आना हिन्दी साहित्यके इतिहासमें एक बहुत बड़ी घटना है। प्रिंस आव वेल्स म्यूजियम बम्बई। गणतन्त्र दिवस १९५२। परमेश्वरी लाल गुप्त