चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५८ ३३१ ( बम्बई ३ ; मनेर १६२ (१) ब ) सुनीने गुफ़्तारे लोरक मरहमत कर्दन राज्य बर लोरक ( लोरककी बात सुनकर राजाका लोरकपर उदारता दिखाना ) सुनि राजा अस किन्हि बिसाऊ । माइ हमार जो आइ भगाऊ ॥१ दीन्हि सिंघासन (अउर)¹ तुरंगा²। पन्थ लाग तुम्ह राइ फरका³ ॥२ रफा नाइस परसाद दिवाई । [तुरत बेग पतरा लेइ आई]⁴ ॥३ सेठ करौं⁵ जो इहवाँ रहहू । सो मन मान तिह तुम्ह जाहू ॥४ तिह के बात न पूछै कोई । बिहके साथ तिरी एक होई ॥५ राइ बाँमन दुइ दीन्ह⁷, जित भाषइ तित जाहु ।६ घर फै कही न पारौं, मया¹¹ करहु तो रहाहु ॥७ मूल पाठ—(२) आखठ (अलिफ वाव शाव) । ३ के स्थानपर 'शम' लिपिकरकी भूल है । पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—मरहमत कर्दन राव करका बर लोरक (राव करकाका लोरकके प्रति उदारता प्रकट करना) १—अउर । २—तुरंगू । ३—बड्डु लाय तुम्ह लाग करंकू । ४—कात । ५—लै आयी । ६—करहु । ७—नहि जो मन होइ तिहवाँ जाहू । ८—बात करै न कोई । ९—जो परदेशी तहँगा होई । १०—राइ बाँम्मन दून दीन्हे अगूवा । ११—मयाह । ३३२ ( रीडिंग्स १५८ : मनेर १६२ (२) अ ) अर्ज दाश्त कर्दन लोरक पेशी राव करका ( राव करकाके लोरकका निवेदन ) सुन राजा एक ब...रा । हा बास ... बिहारा¹ ॥१ हरदी आहि हम... । मन धरि घ... तेहिँ जोगू ॥२ अस रात गाहिं ... । भीम नाइरे ... लीन्हा ॥३