चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६७ पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति— शीर्षक—(बं ) बयान गुफ्तन राव करंगा लोरक व चाँदा रा (लोरक और चाँदा को राव करंगा का उत्तर) (म०) रीसैण्ड्स प्रतिके समान । १—(बं ) राजा : (म ) राजै । २—(बं ) बूझी : (म ) बाहँहि । ३—(बं ; म ) सो । ४—(बं ) कहु कबहुँ । ५—(म ) अबहुँ कहु सो र हाँ करौं । ६—(ब ) जी मारे के खरि पिराया (म ) जी मारौ के छुरी मरी । ७—(ब म ) लोरक । ८—(म) नरिन्दर । ९—(बं ) मेदिन कहै बड़ा है राउ । (म ) मेदिन कहै भला है राउ । १ —(बं ) राठ हुतै न होइ अन्याऊ; (म ) राय हुतै बड़ होइ न काऊ । ११— (ब ) तुम नरबइ अस्बाठ न जानहु (म ) जो तुम्ह नरबइ निकाहि जानहु । १२—(बं ) जो सुर करहि देस कहँ पानहु (म ) जो मस होइ छोइ तुम्ह मानहु । १३ (ब ) राजा भया करउ तुम हरदी पठवहु मोहि (म ) राजा भया मोह कइ, हरदी पठवहु मोहि । ३३० ( रीसैण्ड्स २५० ) शफ़कत कर्दने राव करका बर लोरक ( राव करका का लोरकके प्रति उदारता प्रकट करना ) रावैं आगे लोर हँकारा । अँकवन' लाइ पाट बैसारा ॥१ पूछइ बात लोर महँ कूहऊ । माँस चार तुम इहवाँ रहऊ ॥२ पुनि मैं पठउब पाटन लोरा । बार न बंफा होइ बिहि तोरा ॥३ चाँदहि आन मंदिर बैसावहु । तुम्ह सँसोइ छतसार उतारहु ॥४ घोर आन बाँधहु घोरसारा । हमार कुटुंब वानउ परिवारा ॥५ सुन लोरक अस भवैं, राजा हम न रहाहिं ।६ गोवर छोड़ हम आये इहवाँ, अब हरदी दिसि जाहिं ॥७ टिप्पणी—(१) अँकवन—अँकमे। (२) इहवाँ—यहाँ। (३) पठउब—भेजूँगा । बंका—धोखा देना । (६) रहाहिं—रहेंगे । (७) जाहिं—जा रहे हैं ।