चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६६ वरइ^{१३} बिरोधैं^{१४} नरबइ, छाड़ि चलै घर बार। ६ इमरे अकेले दो मनई, न भिखारी फुटबार^{१५} ॥७ पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति- शीर्षक—(ब) गुफ्तने शुमारदारान दर लोरक व पौदा करदन रवान करदन पेश राजे (लोरक और चाँदेसे ब्राह्मणोंका एकके पास एकका चलनेको कहना) ; (म)—रफ्तने लोरक पीछे राज करका (लोरकका राज करकाके सम्मुख जाना) दोनो प्रतियोंमें पंक्ति १ और २ क्रमशः २ और १ हैं। १—(ब) नै पुनि। २—(ब) आपुन पा; (म) आपुन पउ। ३—(ब म) हम बिफरें मन महँ किन हारहू। ४—(ब) नेवरि। ५—(ब) सँबो (म)—सँबोह। ६—(ब) जाइ करका पठ; (म) पठ करका जाइ दुआरा। ७—(ब म) भुवि। ८—(ब) चली (म)—पउत। ९—(ब) राह सेवै हम (म) रे सो हम। १०—(ब म) रुताये। ११—(म) दुँहु महँ एक थान ले राज; (ब) दुँह मह एक ले थान राउ। १२—(ब म) बीर। १३— (म) बिरोधैं। १४—(ब) हमरे अकेले आह दो जन, माइ बीर घरबार, (म) हम अकेले दोइ मानुस बैरी भए सर्वखार। टिप्पणी—(७) मनई—मनुष्य व्यक्ति। ३२९ (रीडींग्स १५६ बम्बई २१ : मनेर १६२ (१) क) जबाब दादन राव मर लोरक रा (रावका लोरकको उत्तर) सुनि राजे अस उतर दीन्हा। जो हम सूझी सो^{१} तुम कीन्हाँ ॥१ अर्थ कहु मो पात कराऊँ^{२}। के पारी कें घर फिराऊँ^{३} ॥२ सीस नाइ लोरहिं^{४} अस कहा। गरु नरिन्द^{५} राठ तूँ अहा ॥३ मेदिन कई बड़ा हुँत राऊ। राइ दुहुँ हैं बड़ा नियाऊ ॥४ तुम्ह नरबइ नियाठ सब मानहु। जो धुर करहिँ देस घर आनहु^{६} ॥५ मारग चले यहैँ दिसि, लोग असीस तोहि। ६ जो रे संतापइ कोइ, सा हत्या पुनि मोहि^{७} ॥७