चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४५ ३२७ (रीडिंग्स २५५; बम्बई २७) आमदने जुम्लारदारान व गुफ़्तन लोरक रा (ब्राह्मणोंका लोरकमे आकर कहना) बाँभन जाइ सो दीन्हि असीसा । बात सुनत सब' उतरी रीसा ॥१ लोरक कहा चाँ० कस कीजइ । इहँ बाँभन का' उत्तर दीजइ ॥२ बहुतै जन हम इहँके मारे । मूँड़ फाट के दीन्ह अवाय" ॥३ जं पर राजा लागि गुहारा । क्षस मरत कै दयी उपारा' ॥४ राजा आइ मल_तहँ नियाइ । सुनफे घास तिहिं कइसि पठाई ॥५ मता जो इम तुम उपजं, चाँदा अउर न काऊ आह' ।६ माइ पाप बन्धु कोउ नाहीं, बाँभन पूछहु काह' ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—रसीदने जुम्लारदारान बर लोरक व चाँदा (लोरक और चाँदाके निकट ब्राह्मणोंका आना) १—बाँभन दीन्हि आ० अशीसा । २—मन । ३—इ पहुनहि (?) कस । ४—बहुत लोग । ५—मूँ० मुंड़ार जो रीस निसारे । ६—जै ऊपर अब उठे गुभारी । सूझि मरै जो लागि गुहारी ॥ ७—राउ बरा औ महै निवाइ । धन पान दइ बाघ पठा ॥ ८—सों पर भल आहि । ९—भा० बपु लोग न कुटुँबा पहुन (?) पुछ अब जाहि ॥ ३२८ (रीडिंग्स २५५ बम्बई २८; मनेर १९१ख) बाज आमदने जुम्लासदारान बर लोरक कलामे राव करका (ब्राह्मणोंका आकर लोरक से राव करका का सन्देश कहना) एक बाँभन गा फिर दस आये । बचन राइ कै आइ सुनाये ॥१ चलहु लोर अपने पी' धारहु । हम जियतैं जीउ जिन हारहु ॥२ पठा लोर सँजोइ उतारा । आइ करफ्स राइ जुहारा ॥३ बहुतै बैँरँ चलि हम आये । राजा सोक घरी सँवामे ॥४ नैन न देखा सुनौं न काऊ । दुइँ महँ दान लीन्ह बटाऊँ ॥५