चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१४ यह पर साथ बुलाइ, अमरित बचन सुनाइ ९।६ गाँउ ठाँउ सब वहँकौं' दीजइ नित भाषइ तित जाइ" ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीषस—दास्तान तलबीने कर्दने बल्लभ रायतने मर्दुमान (जपन काज मिपासे पद्यमर्थ) १—सुनी। २—सबाने। ३—तुम्ह पुनि। ४—अपाने। ५—को परदेसी भाषा हाई। ६—एकहि एक मियरे होई। ७—सबी लैबोय बर बहि वमसनावइ। ८—दार। ९—सुहाइ। १ —विह। ११—नित नित भाषइ तुर आइ। ३२६ (री०कण्डम १५३। मनेर १६१अ) दिरस्तायने राव करका यह जुभारदाशन रा बरे गोरक (राव करंकरका दस ब्राह्मनोंको कोरबके पास भेजना) बाँमन दस बिप्रबंस बुलाये। बोल' बाष दै राठ' पठाए ॥१ जिहँ पर' आवहँ तिहँ पुन आनहु। जो यह कहँ सोइ तुम्ह मानहु ॥२ कही दान्ति हुत यह अन्यामी' । नाँक कान भल कूँचि कटाई ॥३ और जो मारे यह कोतबारा। तिहि औगुन है नियाउ तुम्हारा ॥४ राह पूर वह तुम्ह हँकराबै । जब चित पावई तब उठ जाई ॥५ इम राया" के परजा, बिप्रबंस पण्डित सब आइ" ॥६ दिस्टि पसार देखों को पावइ, इसै जूफरा काह" ॥७ पाठान्तर —मनेर प्रति— शीषस—दास्तान तलबीदने राव जुभारदाषन (रायका ब्राम्हनोंको बुलाना) १—बाध (?)। २—राड। ३ —विधि। ४—विधि। ५—कत। ६ —कहेउ बानी हुते अन्यायी। ७—कीन्ह कटाइ। ८—बुलवाइ। —ओ तिह। १ —बाध (?)। ११—पुनि नित भाषइ तुम्ह आई। —राभा (?)। १३—बोहि। १४—दिरिट अपार देखको पारे, पैन जगत कह आइ ॥