चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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(रीडिंग्स् २५१ : मनेर १६ अ) पुरखीदन राव बिदा रा, व जवाब दादने ऊ (रावका बिदासे पूछना और उसका उत्तर देना)
निधइँ आन घोर१ एक दीन्हौं । पूछहि बात२ सो आगें कीन्हा ॥१ डरनहिपुरुख सो कैसें अहा३ । कौन सँजोग कौन निधि रहा४ ॥२ एक पुरुख औ दूसर नारी५ । तीसर न कोउ नाठ औ पारी६ ॥३ मत बुध होइ पच कहत न सोई । वैं खतरी पुरुख औ जोई७ ॥४ वह रे अचूक८ पान सर मारइ । वह रन खेले९ सैरंग सँभारइ ॥५ देख सँजोग राइ तिहँ बोलेउँ१० , माँगिउ११ अजफर दान ॥६ बन मानुस सम१ जीव गँवायउँ, आपुन१२ नाकि औ कान ॥७
पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—पुरखीदने राव बुन्दै रा (रावका बुदरसे पूछना)। १—बुदर तुरी फन्दान । २—बात पूछि । ३—टर तिव पुरूस केर कस आही । ४—रही । ५—एक पुरुस दूसर इइ भारी । ६—तस न कठनों नाउ बारी । ७—इप बुद्ध कै पच जग मोहइ । रेन माँझ चाँद अस सोहइ ॥ ८—वह अचूक । ९—वह सुन गारी । १०—दवी सँजोग राइ मत मुहि कहें । ११—बिह माँगे बीउ । १२—उपरी ।
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(रीडिंग्स् २५२ : मनेर १६ ब) मुशावरत कर्दने राव करका बा दानायाने खुद रा (राव करंका का अपने मन्त्रियोंसे परामर्श करना)
पाठ सुनत१ सब मिले समाने । कै तुम्ह२ नरपइ भये अयाने ॥१ जो परदेसी एक नर होई३ । रुख जो मिलै मान लें सोई४ ॥२ यहिफर साइन को सुधि पावइ । दयीं सँजोग दख न चखावइ ॥३ जानइ बात सबै संसैसारा । एक हारीं औ होई मुँह कारा ॥४ काई पाच दइ वह हँकवाई । अस खतरी जो रहु अरुझाई ॥५