चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६२ (६) बहवा—मेवा। बेल—सिरफल : श्रीफल एक फल जिसका छिलका अत्यन्त कड़ा होता है। (७) हँकारहु—पुकारो। ३२३ (रीडँगड्स १५ : मनेर १५१ख) आमदने बिद्या पेशे राव ब फरियाद करदन (विद्याका रायके पास आकर फरियाद करना) कटि हाथ मुख कीन्हा¹ फारा। बाँधे बेल तिँह जोरी बारा² ॥१ इहिँ बर बिद्या आइ तुलानाँ। देखि नगर महँ परा भगानौँ ॥२ देखत लोग अचम्मै⁵ रहा। पूछतँ⁶ बात न बिद्याहिँ कहा ॥३ बिद्यहिँ राइहिँ कीन्ह पुकारा। हुत जेवनारहिँ राऊ हँकारा⁷ ॥४ बिद्यहिँ राइहिँ कीन्हि (जुहारा)⁷। पूछा राऊ कँ यह सारा¹¹ ॥५ कौन परै अस राजा, आबा देस हमार¹² ॥६ राउत पायक बँदिको, लागो जाइ गुहार¹³ ॥७ मूलपाठ—(५) जुहार। पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान रफ्ती गुप्त बूरीदने नोरक ऊ रा (नोरकका उसका हाथ कान काट लेना)। १—हाथ काटि कीन्हो मुख। २—बाँध बेल थी जोरी बारा। ३— इहँ बिध सुरर। ४—म०—सभ। ५—अचम्मो। ६—पूछहि। ७— जुहारँ। ८—पानी फफ्ती सार। —बाँउ राउ वहाँ जेवनारा। ९— जुहार राजहि जाइ जुहारा। ११—पूछ मँडारी बिकठै जस बारा। १२— मयऊँ बड़े अस राजा बिद्यह देखन्त (?) हमार। १३—दानी मार कांधवार जा मारी जाग्रद् बेगि गुहार। टिप्पणी—(१) फारा—फाना। बेल—श्रीफल सिरफल। जोरी बारा—केशको बाँधा।