चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६१ ३२२ (रीडैम्ब्डूस २७९; बम्बई ४५ मनेर १५९ अ) गिरफ्तार शुदने बिद्या व दस्त बुरीदने गोरक (विद्याका पकड़ा जाना और गोरकका उसका हाथ काटना) विद्यादानि¹ बीत कर गहा² । दस अँगुरी मुख मेलत³ अहा ॥१ कहा पीर मुँहि देहु⁵ जितैं दान् । जीठ छाड़ि काढ़ु मङ् कान्⁷ ॥२ मूँड़ मूँड़ि सब छारै घरे⁸ । हाथ काट अँगुरा⁹ मुँइँ परै¹⁰ ॥३ नौखंड प्रियमी सुना¹¹ न काऊ । वइस दान को देहि¹² बटाऊँ¹³ ॥४ अस कहि दानि अन्यायी होई¹⁴ । जो अस करै पाठ तस सोई¹⁵ ॥५ मुँह फारा कै¹⁶ विद्या,¹⁷ पठवा¹⁸ बेल बँधाई ।६ आपुन राउ¹⁹ फरका, विद्या²⁰ बेग हँकारहु²¹ जाइ ॥७ पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति— शीर्षक—(ब) कुसुम्मत शुदन बाज़ गवारियान व गोरक बा घोड़ा (गोरक और जोड़ेका दानियोंकी मरम्मत करना) (म) दास्तान इज्जो इनहाज कर्दने खुद पेशो गोरक (हुदरंका कारूसे अनुनय करना)। दोनों ही प्रतियोंम पंक्ति ४ और ५ क्रमशः ५ और ४ हैं। १—(ब) बिद्या जोर, (म) हुदरं बाह। २—(म) पर कहा। ३—(म) दस अँगुरी मुँह मेलत (१)। ४—(ब म) कहइ। ५— (ब) मुहि; (म) मोहि। ६—(म) दै। ७—(ब) किय। ८— (ब म) दानूँ। ९—(ब) कहा नाक औ काट काँनूँ (म) ठावेऊं नाक और काटउँ कानूँ। १०—(ब) मूँह मूँड़ि सर खोरिया परी; (म) मूँड सुझाइ सर बोरी घरी। ११—(ब म) अँगुरी। १२—(म) परी। १३—(ब; म) प्रियभी सुनों। १४—(ब) देह (म) दह। १५—(म) न पाऊ। १६—(ब) अस अन्याई दानि न हो- (म) अइस दानि अन्याइ न हाई। १७—(म) होई। १८—(ब; म) सुरत कापी। १९—(ब) कर। २०—(ब) बुदया; (म) हुदई। २१—(म) पैठि। २२—(म) राह। २३—(म) 'विद्या' शब्द नहीं है; (ब) हुदर। २४—(ब) बुलवैहु। २५— (म) कह बाह। टिप्पणी—(१) बीत कर गहा—'पीत कर गहा' पाठ भी सम्भव है। (४) प्रियमी—पृथिवी।