चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७१ ३३६ ( मनेर १६७भ ) दास्तान आमदने गारुड़ी न गुफ्तने मन्तर बर चांदा ( गारुड़ीका जाकर चाँदपर मन्त्र फूँकना ) रूपन लागि मन्त्र उँह कही । सुनतहि लोग अचम्भै रही ॥१ भरि एक रात चाँद हुत डसी । डसतहि मुई न बिसफर बसी ॥२ अगनित गुनी सबै चलि आवा । होई अकारन मरन न पावा ॥३ बिपतैं जीउ न काहुँ माई । डसतहि मुयई परट पर आई ॥४ अब सो गुनी मन्त्र एक बोली । सुन पावा इसराफस टोली ॥५ देख गुनी मन चिन्ता, अखेतैं मन्त्र एक बार ।६ गुरु कै बचन सँभारउँ, जीउ देइ करतार ॥७ ३३७ ( मनेर १६७ब ) दास्तान जिन्दाशुदने चाँदाका बेफरमाने मुरादारा ( ईश्वरेच्छासे चाँदाका जीवित होना ) पिरम मन्त्र जो गारुड़ पढ़ा । बँफर लहर सुन चाँदहि चढ़ा ॥१ कर कगन अमरन सभ दीन्हा । औ सो गारुड़ माँगि कै लीन्हा ॥२ हरदी समत चले फिर आयी । कीन्हि सिघासन चाँद भलाई ॥३ दुँहु के मन कै पूवी आसा । करहिं बहुत मन भोग बिलासा ॥४ अलखनिरंजन आदि बियातइ । दई क लिखा सो मानुस पावइ ॥५ भरम दरम सभ सोही, चाँदा ओ बीउँ संसार ।६ तुम्ह मुई तुम्हहुत जिउ देवेतैं, मरत न लागत बार ॥७ टिप्पणी—(१) गारुड (स गारुडिक)—विषवैद्य सरपका मन्त्र जाननेवाला । (३) बिलासा—देखिये टिप्पणी १५२।६ । (५) अलख निरंजन—(नाथ पंथियोंकी भाषामे) ईश्वर । आदि—निश्चय । दई—ईश्वर, भाग्य ।