चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७२ (६) दरब (द्रव्य)—धन । (७) बार—विलम्ब, देर । ३३८-३४३ (अनुपलब्ध । सम्भवतः निम्नलिखित कड़वक इस बीचके हैं।) [ १ ] ( बम्बई ३१ ) जंग कर्द गोरक बा अमीरपान व पूज्यानान व बाजीउफ़तन्द व बाज़ीगुरीख्तन ( गोरकका अहीरों और महलियोंसे लड़ना कुछ मारे गये कुछ भाग गये ) सभ महलियों गिरे घरू आनी । नियरे मीचु दसी दइ आनी ॥१ धँस बीर कोप्या सब जीउ आन । ओही धनुष परो गिउ आन ॥२ जो सँभारे सो तस मारा । को रोवइ कइ करइ पुकारा ॥३ एक महँ होइ उठे सोमहाई । बहु मारे बहु गये पराइ ॥४ आतहिं मरहिं ब्यान नहिं पारैं । आगें मास पाछें निहारैं ॥५ धीबो रहम पहेलिया, तिहकौं मीचु घटान ।६ कउवा चील्ह सा(भाग) मा, जम्बुक गीध अधान ॥७ मूल पाठ—भुग (बे हे गाफ) । [ २ ] ( बम्बई ३२ ) बाजे जंग शुजायस्त रवान शुदने चाँदा व गारक तरफ हरदी ( चाँद और गोरकका युद्ध क्षेत्रसे हरदीकी ओर रवाना होना ) रकत कँहूँनी उबे गँधाई । चला छोर छोड़िहूँ सो ठाँई ॥१ पुनि बीर ओडन कर लीन्हा । पुरुख दिसा तब पाँवत कीन्हा ॥२ करि कै खेती साझर घाती । चौरासी सत्त निंदरा मूती ॥३ रुण्ड मुण्ड मँह मेदिन पारा । बहु रोवैं बहु करहिं पुकारा ॥४ बैंतरत नदी बो भइ पनबारा । डाकिन आगिन उतरहिं पारा ॥५