चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचलो सो बनखंड लोरक, बसेउ विपिन बन जाइ ।६ पाकर रूख देख फर, तिह तर रहे लुभाइ ॥७ ३४४ (रीसेंड्स ३५९; बम्बई ३३) मौंदने लोरक व चाँदा शब दर बयाबाँ व मार खुर्दने चाँदा रा जेरे दरख्त (रात्रिके समय चाँद और लोरकका वृक्षके नीचे रुकना और चाँदाको साँपका डँसना) चलत चलत जो भइ गइ साँझा । कीन्हि बसेरा बनखंड माँझा ॥१ पाकर रूख देखि छितनारी । तिहिं तर बसे पुरुख औ नारी ॥२ सेइ मूँज सुख सेज डलाई । सूता सुरुज चाँद गियँ लाई ॥३ बँधवें जोन' मयठ अँधियारा । पाछिल रात होत भिनसारा ॥४ सिंहिस्त बिसहर दीन्हि दिखाई । चाँदहिं डसिकै गयउ लुकाई ॥५ अस सुकुमार लहर जो आई, खात' गयी मुरझाइ ।६ एक बोल पै बोलसि चाँदा, लोरहि सोवत जगाइ ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—शब रफ़्तने राह शब दर बामद व कुरुद बामदन्द । जेर दरख्त पाकर ब मार कसीद चाँदा रा (मार्गमें रात्रि होजाने पर रुककर पाकड़के वृक्षके नीचे सो रहना और साँपका चाँदाको डसना)। १—अधवें जोन्ह । २—म । ३—चाँदहि । ४—सति । ५—ओ कइरंहि । ६—कार्टेन्हि । ७—एक बोल पै बोली चाँदें सुता लोर जगाइ । टिप्पणी—(१) बसेरा—निवास । माँझा—मध्य बीच । (२) पाकर—पीपलकी जातिका एक वृक्ष । रूँख—वृक्ष । छितनारी—घना । (४) पाछिल—पिछला । भिनसारा—सुबह । (५) सन—उस समय । बिसहर—साँप । (६) सुकुमार—सुकुमार, कोमल । (७) लहर—विषका प्रभाव । (८) खात—खाते ही (सर्पके विषसे प्रभावित होनेको 'लहर खाना' कहते हैं) ।