चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७४ ३४५ (मधुरकथा) ३४६ (रौतँबूल २६१ : बम्बई ३७) गिरिया करने लोरक अज बेहोशिये बाँदा (चाँदो मूछँपर लोरकक विलाप ) छाड़ेउ माइ बाप' महतारी । तजेउँ बियाही मैना नारी ॥१ लोग कुटुंब घर बार बिसारेउँ । देख छाड़ि परदेस सिधारेउँ ॥२ गाँठ ठाँठ पोखर अँबराई । परहरि निसरेउँ कवन उपाई' ॥३ अरब खरब कर लोग न कीन्हेउँ । चाँद सनेह देसन्तर लीन्हेउँ ॥४ विष होइ बाट बात' परी करतारा । न धनि भयउ न मीत पियारा॥५ भइ मात अब आनेउँ, चाँदा तोरें मरन निदान' ।६ जो जिठ जाइ कसा कस देखहि', मैं का करब मधान ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—तन्हाई व बेकशीए खुद ममूवने लोरक अज बराये चाँदा मुम- एक शुदन (लोरका अपने अकेलेपन और विवशता पर तड़पना और चाँदके लिये परेशान होना) । १—बाप माइ। २---कवान पाई (काफ मूल आलिफ सून थे, बालिफ ये धून) सम्भवत बालिफ सून आये पीछे किगर गये हैं। मूलपाठ 'कँवन उपाई' है। ३—'बात' शब्द यहाँ है। ४-ना। ५- भइ र बात अब ब्यानहि चाँदा मोर छन होत परान । ६—दैठौ । टिप्पणी-(१) परिहरि-परित्याग करके । बिसरेउँ-निकला । ३४७ (रौतँबूल २६२ बम्बई ३५ सबेर ३६५ख ) पैंजन (वही) जीउ पियारा निसर न जाई । पिस न गाँठि मरतेउँ कें खाई' ॥१ मरिहउँ कोइ करुँ सो उपकारा । जीम' खाँड़ इनि मरउँ कटारा ॥२