चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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चाँद मुयँ कित पावइँ' लोरा । साथ किये सो पहिगै मोरा' ॥३ नैन नीर मरि' सायर पाटी । नाव चढ़ाइ चाँद गुन झटी ॥४ दयों गुसाँई सिरजनहारा । तोहि छाड़ि कस करउँ पुकारा ॥५ जस कीन्हेउँ तस पायउँ, चाँद रहेउँ मन लाइ ।६ जो पाउर मनुसँ चित बाँधि, सो अइसै पछताइ ॥७
पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति— शीर्षक—(बं ) मने खुद किवा साखने लोरक बज बजये चाँदा वाकवाये हाले खुद बाव नमूदन् (चाँदाके वियोगमे लोरकका आत्महत्या करने की बात कहना); (म ) गिरीस्तने लोरक व फरियाद कर्दने ऊ ( लोरक का रोना और फरियाद करना ) । १—(ब ) किउ नहि गाँठ जो मरतेउँ खाई, (म ) किस नहि गाँठ मरब जो खाई । २—(बं ) मरिहउँ कठनै करै उपकार; (म ) माणिहउँ कठनैउँ के उपकारा । ३—(म ) ओहि । ४—(बं ) पाठब (म ) पाबहि । ५—(ब ) साथ किये सो बहि गै हम नहिं भोरा (म ) सो कहि ने तोरा । ६—(ब म ) गै । ७—(बं म ) रूपी । ८—(बं म ) किह । —(म ) खंड पाँव । ९ —(ब ) मनुसे (म ) मनुसहिं । ११—(ब म ) अन्सहिं ।
टिप्पणी—(१) निउर—निकष । (४) सायर—सागर, समुद्र । पाटी—भर दिया । गुन—रस्सी । (५) कस—किस प्रकार । (७) पाउर—पामर, मूख । अइसै—इसी प्रकार ।
३४८ ( रीडिंग्स ३५३ : मनेर ३५५अ ) गुफ्तने लोरक बरख्ते पाकर (लोरकका पाकर वृक्षके प्रति उद्गार) बैरिन भइ सो पाकर रूखा' । जिंह तर बसें परा महिँ दूखा ॥१ फाटि पेड़ जरि भूर उपारों । डार डार चीर कै पारों' ॥२ सरि रच आग चहूँ दिसि बारों । चाँद लाइ गियँ आपुहिँ जारों ॥३ देस देसन्तर गये मोर लाजा' । सुरुज चाँद कइ निसि लै (माजा)' ॥४