चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७६ जो यह पिख और बिरी बाह्रैँ⁷ । नरक कुण्ड मह पुरखा पाड़ैँ⁸ ॥५ पत्त न होइ सत छाड़ें, हानि न होइ फुर कान ।६ तोरें पुभि फोर मञ्जानों⁹, घिय पराइ आन ॥७ मूलपाठ—(४) भागा । पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—मलामत करने गोरक बान दरख्त रा (गोरखका पेड़की भर्त्सना करना) १—करता । २—भादि । ३—डार बार कै बाहली पारौं । ४—भाग । ५—देख देख मुर बहि गइ गाजा । ६—सूरज चाँबहि के निशि माथा । ७—अप को फिरित विह और न बारौं । ८—नरक कुण्ड हम पैंदा (?) पाड़ौं । ९—तोर और बोलर मैझानों । टिप्पणी—(१) तूखा—फल कलेवा । (२) अरिमूर—जड़ मूल । उपारौं—उखाड़ूँ । डार बार—डाल डाल । बारौं—बहाऊँ । (३) सरि—चिन्ता । (५) पुरखा—पूर्वज । (६) फुर—कुछ । कान—लाज, प्रतिष्ठा । ३४९ (राँचेन्ड्स १६७ : बम्बई ६२ : मनेर १६५क) गुफ्तने गोरक बर मार रा व तासुक कुर्दैन (गोरखका सर्पके प्रति उद्गार और खेद) कारे¹ नाग सत्तुर बटपारे² । मीत³ विछोह कीन्हि हलबारे ॥१ बरु यहिं खावसि बहुत रे कुघाती । काहे देखी हैं मोर संघाती⁴ ॥२ तोरेह ढैंठ आइ जो बसे । पुरुष छाड़ि कित नारी डसे५ ॥३ मन्त्र सक्ति कै सत्तुर चलावा । कैं रे नाग तू गाइन आवा ॥४ कै तों बावनबीर पठावा । छाँद उसहिँ¹¹ नाग होइ आवा ॥५ विहने⁷ कारन मैं¹२ जीव नियारा ' दखतौं मळसन्ताप ।६ विह सेतें बिषपाही, जरबज मारी साँप ॥७