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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२७७ पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति— टीका—(बं ) दामाद गुफ्तने लरक बाक्ये हार गुन अन बुझइ चाँदा अन्देशमन्द (लोरकका मने प्रति उद्गार अन चान्दा किए व्याकुल होना)। (म) सलामत बदने लोरक ब पटकुआ बदने मार रा (लोरकी भर्त्सना करना और शाप देना) १—(सं०) काते। ५—(ब ; म) वरकारे। ३—(बं ) मील। ४— (बं, म) ह। ५—(बं म०) काइ दोगी मार अघाती। ६—(बं ) पुरुष छाडि मरोहि बल देखै। (म) पुरुष छाडि बल बिगिदि टने। ७ (बं) कै। ८—(सं०, म) पठाबा। —(सं०) बैठ कान तूं गुलनहि लगा; (म) बैठ कान से गुलन लगा। ९—(बं) तुहि। ११—(बं म) बाँसहि हम। १२—(बं म) जिह। १३—(म) हौं। १४—(म) नियण्ठ। टिप्पणी—(१) वरचार—वरभार। (२) दुआती बुरे कुल्भे रच्छा हुआ। गंवाती—नासी। (३) डाँड—म्यान। (४) गाहब—माप। (५) बाबन बीर—चाँदबा पति। (६) बिचगाडी—बीस रातामें। असवत—अकारण शत्रुता उत्पन्न करना। ३५० (रीसंण्ड्म २३५ ; बम्बई ३६ ; मनेर १६२ख) अस्नान करुन लोरक बम गदहाही चाँदा (चाँदकी मूर्छापर लोरकका विलाप) कै रे¹ कुदिन हम पौंयत घरा। कै रे² कलाप³ मैना कर परा ॥१ कै रे⁴ कुलुप जिउ भारी कीन्हों। कै रे⁵ सराप माइ मुहिं दीन्हों ॥२ घरी धरत गा पंडित पुरानाँ। कै हम कुसगुन कीत पयानाँ ॥३ इत पइ भयउँ न चौंट⁷ दुछायतें। कउन पाप दइया में¹⁰ पायउं ॥४ यह रे¹¹ महर जिय नारि अदोसी¹²। कै रे¹³ निपूती चाँदा कोसी ॥५ कै गयउँ कछु दइ मुकरावा¹⁴, दोस सुबरहि लाग। ६ कउन नींद सुम¹⁵ सती¹⁶ चाँदा, सपनें¹⁷ मयउ सुहाग ॥७