चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७८ पाठांतर—बम्बई और मनेर प्रति— शीर्षक—(बं) सदकशीरींवे खुद नमूदन गोरक राख करदेशम्पद शुदन क्यार औंडा रा (गोरखका बाँदके लिए व्यथित होना और पश्चात्ताप करना) । (म) याद कदने गोरक साकले बद अख्तर रफटन (गोरखका दुष्टाहमें यात्रा आरम्भ करनेकी बात याद करना) । १—(ब म) र । २—(ब) के र । (म) कै । ३—(म) कशप । ४—(बं, म) गोरक । ५—(बं म) र । ६—(बं) के र, (म)—दे । ७—(बं) मुदि । ८—(बं म) कै । ९—(बं) मैं मैं कुसगुन, (म) के कुसगुन हम । १०—(ब म) चाँद न । ११— (म) हीं । १२—(ब) महर : (म) पाहिर (?) १३—(ब) चाँद न बोली (म) चाँध बदोसी । १४—(बं म) कै र । १५—(म) के केई कहु वर सुकराई; (म) के केहूँ कछु दर सुकराथा । १६— (ब, म) तुम्ह । १७—(बं म) सुतहू । १८—(म) जसनाहिं । टिप्पणी—(१) कै—जातो । कुरिन—अशुभ दिन । पौषत—प्रस्थान । कशप— दुखसे व्यथित हृदयसे निकला हुआ शाप । (२) सराप—शाप । भाई—गई, भाटा । (३) बरी—घड़ी । बरत—रखते हुए । गा—गथा 'का' पाठ भी सम्भव है । उस अवस्था में अर्थ होगा—क्या । कुसगुन—अपशकुन । कीत—किया । पयानाँ—प्रस्थान रवानगी । (४) इव—इतना । चाँट—चींटी । रहसा—दैव ईश्वर । (५) बदोसी—निर्दोष । बिपूनी—सन्तानहीन की । कोपी— शाप दिया । ३५१ (रीडिंग्स २६६ : बम्बई ३ । मनेर १२७५) ऐंजन (बही) नाग मेस होइ पनि धरी¹। छोरहि राम अवस्था परी ॥१ रामहिं हनिवन्त भयउ संपाता । सुद्दि न कोइ करु इहँ² विधाता ॥२ मरिहउँ कोई जो करइ उपकारा³। सिरजनहार देबहिं⁴ निस्तारा ॥३ हनिवन्त सीता कइ पसि मारी । लंका खोट खोट कँ जारी ॥४ हौं पुनि चाँद हरी सो पाऊँ । लंका छाड़ि पलँका जाऊँ ॥५