चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८ द्वीपान्तर (हिन्द एशिया) के द्वीप-समूहों के किसी द्वीपको पलका कहते रहे हों। मलयस्थित पेनांगका भी नाम पलंगा हो सकता है। किन्तु जायसीने पलकामें शिवका निवास बताया है। (२६६।१४)। सम्भव है शिवके निवास कैलासको फलंका कहते रहे हों। इस सम्बन्धमें दृश्य है कि एलोराके कैलास मन्दिरके दोनों ओर जो गुफा-मण्डप हैं उनमेंसे एकको लंका और दूसरेको फलंका कहते हैं। (७) बादर—बादर आकाश, जहाँ तात्पर्य स्वर्गसे है। भुईं— भूमि। ३५२ (रीडिंग्स २६०अ । बम्बई ३६ । मनेर १३८भ) प्रेमन (वही) संग न साथी में में रोवा। मीत जो होत' सो दई बिछोवा ॥१ आँसू सायर भरा फटाइ। नैनन्हि बनखंड' रोइ बहाइ ॥२ कर गहि' चाँद चाँद गुहरावइ । धुनि धुनि सीस नारि पैं' लायइ ॥३ उठइ न दहि नारि मुख' जोया। नाग' डसे बिस लहरँ' सोया ॥४ गाँउ ठाँउ होइ तहाँ धाऊँ। बिखम उघार गुनी कित पाऊँ ॥५ माइ बाप कर दूलह, दुख न आन कस होइ ।६ सो सर परा सो जानै, दुखी होय अति कोइ ॥७ पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति— शीर्षक—(ब) अफसोस व जारी गर्दन गोरख व हमराह खुद शायद (गोरखका दुःखी होकर रोना और अपने कंधेसे होनेरी चर्चा करना)। (म) दर तनहायगी व गरीरिय खुद गुफ्तन गोरख (गोरखका अपनी बेरंगी और अकेलेपनका उल्लेख करना)। १—(म) होता। २—(म) बनखण्डमें। ३—(म) कर धर। ४— (ब) पायइ; (म) धर धर सीस मार पैं। ५—(ब) न दैहि ओर मुँह (म) म दइ कार मुँह। ६—(म) साव। ७—(ब) लहर मदि (म) लहरैहि। ८—(ब) दिह। ९—(ब) परा सा प्यान्या; (म) जौ हर परै साहि पै पायनि।