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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२८१ एक परस मड़ि देउर जागेउँ । जोगी भेस होइ भीख मागेउँ ॥४ बरहा मेलि सरग चइ धायउँ । सिर सेटैं खेलि चाँद लै आयउँ ॥५ घोर चोर कर मारत उबरेउँ, चाँद लियउ लुकाइ ॥६ अब ते' धनि बनखंड गै छाड़ेउँ, फिरि घर आयउँ जाइ ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दर्दमन्दिये खुद गुफ्तन लोरक दरख्ते मुकाबिल (!) (लोरफका साम्हनेके पेड़से अपनी व्यथा कहना) । इस प्रतिमे पंक्ति ३ और ४ क्रमशः ४ और ३ हैं। १—देखा । २—कउन सो छेया । ३—कियहुँ । ४—महरा । ५— फिरम । ६—जोगी भेष भीख पुनि मँगिहूँ । ७— छूटेउँ । ८—त धनि भित्रठ फुड़ाइ । ९—तैं । १ —आबठँ । टिप्पणी—(१) महराई—महता बड़प्पन । (५) बरहा—मोटी रस्सी । मेलि—फेंककर । ३५६ (रौंड्स १६९ : मनेर १४९ब) दुअम रोज आमदने गुनी व पाय उफ्तादने लोरक बर ऊ रा (दूसरे दिन गुनीका आना और लोरकका उसके पैरपर गिरना) एक दिन दुवै रैन सस भई' । चाँद न छूटे गहन जो' गही ॥१ मन चिन्ता कैं² नींद गँवानी । दयी दयी कै रैन बिहानी ॥२ लोरक देख नियर भिनुसारा । चन्दन फाटि कैं चितहिँ³ सँभारा ॥३ चाँद माँध लै सरि पहुंछाई⁴ । नैन नीर तिह आग बुझाई ॥४ फिर जो दीख गुनी एक आवा । मन्त्र बोल औ डाक पठावा ॥५ घालि पाग गियँ अपनें लोरक, परा पाइ सहराइ ॥६ सोवत साँप डसी धनि चाँदा, सो मनि देइँ' जियाइ ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दु शबोरोज माँदने चाँदा दर बेहोशी (चाँदका दो दिन रात मूर्छित रहना) १—एक दिन दूहर रैन तर भइ । २—स्मु । ३—खर । ४—नियर