चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८४ देउ। ५-चितैं। ६-चाँद काढ़ि के सरि पहुँचाई। ७-आनसि आगि आहि परझाई। ८-पाठ। ९-सुतहिँ। १-नूँ महि देहु। टिप्पणी-(३) निअर-निकट। भिनुसारा-सवेरा। (४) सरि-छिप। (५) शुभी-शुभी गबड़ी विज्जैत। डाक-उका (६) बाधि-डाककर। पाग-पगड़ी। सहराइ-सीधे लेटकर। ३५७ (रैलेण्ड्स १७ : मनेर १७ अ) घिरीनी (?) कबूल करने गोरकका मरगुनी रा (गोरखका गुनीको मिठाई (?) देनेका वादा करना) हाथ क मूँदरी१ सरग२ कतारा। कान क कुन्डल चौंक३ गियँ हारा ॥१ अउर जो साथ गाँठ है मोरें४। सो पुनि देउँ बिखारी तोरे५ ॥२ कर उपकार कर जो पारसि। पिता मोर जो महि६ निस्तारसि ॥३ तोरें कइँ चाँद जो लइउँ७। इहाँ अरम घेर होइ रहिउँ८ ॥४ जो न होइ एतबार हमारा। बचा बाँधि कर करहु९ पतियारा ॥५ कोने रात यस मेलउँ, कै सतइस सेउ१०।६ जो र असत११ में बोली, चाँद नियर तुम्ह१२ देउ ॥७ पाठान्तर-मनेर प्रति- शीर्षक-उरीन कबूल करने गोरक हरीने अरथून गर रा (गोरखका मन्त्र पूँछने बालेको आभूषन देनेका बचन देना)। १-कुंतरा। २-कमर। ३-फान कुण्डल चौंका। ४-अउर साथ है गोठी मरैं। ५-देही सब भिखारी तोरें। (बापका असरूज छूट जाने से भिखारी बन्दहारी परा जाता है)। ६-दैहि। ७-तोर बचन चांद जो पहई। ८-घर तोर होहिई। ९-पतियार। १०-के कय। -कातिन वरश यस मेलैं सतसर दाइ तो सेउं। ११-कसिहि (?) १२-तू। टिप्पणी-(१) मुंदरी-अँगूठी। ( ) गाँठ-दाम। मोरे-मेरे। भिखारी-(न भिखारी)-विरोध। (३) निस्तारसि-उद्धार करे। ( ) इतवार-विश्वास। बचा-बचन। पतियारा-विश्वास।