चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८५ ३५८ ( रीबैण्ड्स २०१ : मनेर १७ ब ) मन्तर खान्दीदने गुनी व होशियार शुदने चाँदा ( गुनीका मन्त्रोपचार करना और चाँदाका जीवित होना ) कउन लोग तुम्ह गरुड़ि पूछी । ठाँठ कहु' आँ जातहि' पूछी ॥१ धात गोवार गोषर मोर४ ठाऊँ । घनि चाँदा मँहि लोरक नाऊँ ॥२ गुनी कहा जिन जीउ हुलावसु । धीर बँधहु' अब चाँदहि' पावसु ॥३ बोलि मन्त्र छिरकसि लइ पानी । उतरा बिस चाँद अँगरानी८ ॥४ धाइ लोर घर माँइ उठाई । पिरम पियार सौंपि गियँ लाई ॥५ सरग हुत चाँद उतरि जनु आइ, देख खर बिहसान' ।६ कँवल भाँति मुख बिगसा, दुख जो होत कुँभलान ॥७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—पुरशीदने हकीम बात व नामे लोरक व चाँदा (चिकित्सकका लोरक और चाँदाका नाम और जाति पूछना) १—नाँउ कहु । २—जातो । ३—मुर । ४—है । ५—बाँधहु । ६— चाँदा । ७—पानी । ८—म —चाँदा अँगगरानी । ९—सरगहि चाँद उतरि जनु, देखित लोर विहसान । १ कुँझलान । टिप्पणी—(२) गोवार—ग्वाल । ३५९ ( रीबैण्ड्स २०२ ) होशियार शुदने चाँदा व दादने लोरक गुनी रा जेवर ( चाँदाका उठ बैठना और लोरकका गुनीको आभूषण देना ) हिया सिरान जरत जो अहा । छूटि चाँद निसि गहनँ गहा ॥१ लोरक होत सो आस पियासा । जियइ चाँद मन पूजी आसा ॥२ अभरन अनि फै सम लोरा । तरुवन हाँस आँ सोने खूरा ॥३ इतपुर मोर भाँ कान कै पूरी । मूद भंग और फर्रै क चूरी ॥४ हाथ क करणा सोभन नाँधी । अँगूठी मानिक के फाँठी ॥५