चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकृतज्ञता ज्ञापन सर्वप्रथम मैं प्रिन्स आव वेल्स म्यूजियम, मुम्बई के डायरेक्टर डाक्टर मोतीचन्द्र, जान रीलैण्ड्स पुस्तकालय, मैनचेस्टर (इङ्गलैण्ड) के डायरेक्टर डाक्टर इ. राबर्टसन तथा उसके हस्तलिखित ग्रन्थ विभागके अध्यक्ष डाक्टर एफ. टेलर, भारत कला भवन, काशी के उपहाध्यक्ष राय कृष्णदास, पंजाब राजकीय संग्रहालय के अध्यक्ष श्री विद्यासागर सूरि, पटना के सैयद हसन असकरी, मैसाचुसेट्स (अमेरिका) के श्री फ़्रैन्सिस हॉफ़र, रज़ा पुस्तकालय रामपुर के पुस्तकाध्यक्ष श्री अर्शी का आभार मानता हूँ, जिन्होंने अपने संग्रह की चन्दायन सम्बन्धी सामग्री प्रसन्नतापूर्वक मुझे सुलभ कर दी और उन्हें प्रकाशित करनेकी अनुमति प्रदान की। जान रीलैण्ड्स पुस्तकालय के अधिकारियों का इसलिए भी अत्यन्त अनुगृहीत हूँ कि उन्होंने न केवल मुझे अपनी प्रतिके उपयोग और प्रकाशित करने की अनुमति दी वरन् उसे ढूंढ निकालने के कारण उन्होंने उसपर मेरा अधिकार स्वीकार किया और स्वेच्छया अपना यह कर्तव्य भी माना कि जबतक मेरा ग्रन्थ तैयार न हो जाय तबतक वे उस प्रतिके सम्बन्ध में किसी प्रकार की सूचना किसी अन्य व्यक्तिको न देंगे और तत्सम्बन्धी जानकारी अपने तक ही सीमित रखेंगे। और इसका निर्वाह उन्होंने पूर्णतः किया। रीलेण्ड्स वाली प्रति ढूँढ़ निकालने में ब्रिटिश म्यूजियमके प्राच्य पुस्तक विभागके श्री बी. एम. मैरेडिथ ओवेन्स और इण्डिया आफिस पुस्तकालयकी सहायक कीपर मिस ई. एम. डाइमने मेरी बहुत बड़ी सहायता की। भारतीय कलाके अमेरिकी कला मर्मज्ञ श्री कैरी वेल्चने होपर संग्रहके पृष्ठोंके ट्रान्सपेरेन्सी तैयार कर भेजनेकी कृपा की। लाहौर संग्रहालय की प्रतिके फोटोकी प्राप्ति सुविख्यात चित्रकार श्री अब्दुर्रहमान चुग़ताई और ढाका संग्रहालयके अध्यक्ष डाक्टर अहमद हसन दानीकी सहायताके बिना सम्भव न था। इन सबके प्रति भी मैं अत्यन्त कृतज्ञ हूँ। डाक्टर मोतीचन्द्र के प्रति किन शब्दों में अपनी कृतज्ञता प्रकट करूँ। उनका तो चिरऋणी रहूँगा। उन्होंने मेरे इस कार्य में आरम्भ से रुचि ली और मुझे सतत प्रोत्साहित करते रहे। यही नहीं कोषाकार कार्य में भी मेरा निरन्तर निर्देशन करते रहे, कठिन स्थलोंके पाठोद्धार में स्वयं माथापच्ची की और उपयुक्त पाठ सुझाये। उनके सहयोग के बिना कदाचित मैं इस कार्य को ठीक और सुगमतासे न कर पाता। उर्दू रिसर्च इन्स्टीच्यूट बम्बई के डायरेक्टर श्री नईम अहमद नदवी और उनके सहायक