चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६ पहर रात उठ चले पहारा। कोस चार पर भा भिनसार ॥३ हरदी सीम तुलाने बाइ। सगुन भये एक पाँदुक राई ॥४ महर दाहिने पायें कर बावा। औ दाहिने मिगध के दावा ॥५ महर कहा हुत दाहिनें पायें, सगुन होइ पनार ।६ सिंह मरय तुम्ह सिध पायहु, लोरक बाने सर्वसार ॥७ टिप्पणी—(४) हरदी—इसे काव्यमें अनेक स्थलोंपर हरदीपटन कहा गया है। क० ब० ३९७ क शीर्षकमें उसे केवल 'पाटन' कहा गया है। पाटन (पट्टन <पत्तन) से ऐसा जान पड़ता है कि यह स्थान किसी नदी अथवा समुद्रके तटपर स्थित था। सर्वे आफ इण्डियाकी सूचीके अनुसार हरदी नामक स्थान मध्यप्रदेशमें ३३ महाराष्ट्रमे १, राज स्थानमें २ उत्तरप्रदेशमें ६ और बिहारमें २ हैं। इनमेंसे काव्यमें वर्णित हरदी कौन है, कहना कठिन है। ३९० ( रीडिंग्स २०५ ) सलाम कदने लोरक राव रा दर शिकार व पुरखीदने राव क्षेत्तम रा ( शिकारके निमित्त आये हुए रावको लोरकका सलाम करना और राव क्षेतमका पूछना ) क्षेत्तम राइ बहेर चढ़ा। हरदी फिरहुँत दइ जो कढ़ा ॥१ निकसत राठ ओहारसि सोई। राइ पूछि जाये हँह कोई ॥२ अति गुनवन्त आइ रूपवन्ता। सहसफरों बइस सीमन्ता ॥३ काऊ न चीन्हि सब कइहिं बटाऊ। पाछें राठ पठवा नाऊ ॥४ जो तुम्ह चीन्हउ देखि लै आयसु। यो परदेसी उतार दिवावसु ॥५ हरदी पइठे लोरक, खोर खोर फिर आठ ।६ जाँवेह नगरहि चीन्हिन कोय, सबै लोग पराउ ॥७ ३९१ ( रीडिंग्स १३ ) पुरस्तादने राव इसाम रा बरे लोरक ( रावका लोरकके पास नाई भेजना ) गउ इयाई रावल इक आये। ऊँच मंदिर बलसार सुहाये ॥१