चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२९५ पायन फेर नारि लै आयउँ । चाँदा तिरी महर थिय पायउँ ॥३ हौं जो आइ जें बाँठा मारा । एसौं राउ रूपचंद हारा ॥४ हम पुनि हरदीपाटन चाली । राजा महूभर कें [—*] फानी ॥५ चाँद सनेह जो निसरेउँ, छाड़ि कुटुंब घर बार ।६ तुम्हरे देस यह टूँटा जोगी, रहा होइ भटपार ॥७ टिप्पणी—(७) भटपार—भटमार, बटोद्दियोंको मार्गमें लूटने वाला । ३८२ ( मनेर १८ ख ) गुफ्त[न] जोगी कि ई जन मनस्त ( जोगीका कहना कि यह मेरी स्त्री है ) टूँटा कहै मोर भार वियाही । परी राढ़ तोरै गवाही ॥१ सभा कहै दुन्हु अब का कीजइ । इँह र बह कँइ कस उतर दीजइ ॥२ दोउ कहहि यह मोरी जोई । इँह हुन्हु महँ हरसाख न होई ॥३ यह टूँटा यह राषन अहई । धनि पूछहु दुन्हु वह का कहइ ॥४ चाँदहि मन कुछ चेत न आवा । अइस मन्त्र पढ़ि टूटें लावा ॥५ लोर कहा यह मोरी तिरिया, औ मुहि गोहन आइ ।६ भा भिखार है टूँटा जोगी, सकति घड़इ लइ जाइ ॥७ ३८३–३८८ (अनुपलब्ध) ३८९ ( रीडिङ्ग्स १७४ ) रवान शुदने लोरक व चाँदा व रसीदने नजदीके हरदी ( लोरक और चाँद का चलकर हरदीके निकट पहुँचना ) बाह्र कोस दस ऊपर भये । बहुत भाँति महेहुव रवे ॥१ सभ निसि कहहिं पिरम कहानी । पाठ गहरु दिन रैन पिहानी ॥२