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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२९४ एक एक आपुन बात चलावहु । झूठ साच आपुन तुम्ह पावहु ॥३ उठि लोरक तो गइसा कहा। भइठ ढूँढै यह सेतक अहा ॥४ सिंगी पूर चाँद हर लीन्हा। सगरें रैन खोज मैं कीन्हा ॥५ खोजत पायतँ ढूँटा, घरेउँ फेरि कै पार ।६ झूठ बटा लाग फिरौंइँ, जानौं सब सैंसार ॥७ ३८० (मनेर १० ब) गुफ्त[न] जोगी ई कन मन कन्दा (जोगीका कहना कि यह मेरी स्त्री है) पूछहु सभा कहहु पैंह लोरा। कतैन लोग घर कहुवाँ तोरा ॥१ कहवाँ अइसी तिरी सैं पाई। काफर भिय यह कहवाँ काई ॥२ काहे निसरहु दोइ बन होई । इतर साप न मइइ कोई ॥३ कउन पुहुमिहुत लोरक आइह। कहवाँ नाउ कहौं यह (जाइह) । ४ घर हुत काढे निसरे लोरा । लोग कुटुंब कछु कही न चोरा ॥५ काहि लाग तुम्ह निसरे, साच कहु तुम्ह बात ।६ हम पुन देख नियाउ नियारहि, पूछि तुम्हारी बात ॥७ मूलपाठ—(४) माहह (बीमके ऊपर अनावश्यक गरवज असावधानी बन दिया गया है। टिप्पणी—इस कडबकका शीर्षक विषयसे सर्वथा भिन्न है। वस्तुतः यह कडबक ३८२ का शीर्षक है। उसे लिपिने दुहरा दिया है। ३८१ (मनेर १०४ब) पुरसीदन बातें गुवाल रस्म लोरक जन चांदा (ग्वालकी बात और लोरक और चाँदाका ग्राम पूछना) जात अहीर हम लारक नाऊँ। गोवर नगर हमार पुर ठाऊँ ॥१ सहदेव महर कह चाँदा बिया। महर बियाह बाभन सेठें किया ॥२