चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२९९ १—बिहानी । २—कहानी । ३—रा० । ४—बीर । ५—राइ । ६—मागीर । ७—राइ । ८—हँऊरामे । ९—सँबोगे । १० — मिलवउँ । ११—हमारैं । टिप्पणी—(४) सोगीर—सम्भवतः शुद्ध पाठ मागीर है जैसा कि बम्बई प्रतिमें है । यह उड़ीसाका एक प्रसिद्ध स्थान है । राइ करिंका—सम्भवतः करिका, कलिङ्गका रूप है और यहाँ तात्पर्य कलिङ्गनरेशसे है । इन भौगोलिक पहचानोंकी प्रामाणिकता काव्यमें आये अन्य भौगोलिक पहचानों पर ही निर्भर है । ३९५ ( रौलेण्ड्स २८ : बम्बई २ ) अस्वान दहानीदने राव मर लोरक रा व बर्गे सम्ब दादन ( रावको लोरकको घोड़ा और पान देना ) सेंइप राइ पान कर लीन्हों । निभर$^१$ हँकार लोर कहँ दीन्हों ॥१ सीस चढ़ाइ$^२$ लोरक$^३$ लेतसि । रहसि फैंकान राइ फुनि देतसि ॥२ सिंहि तुरिया चढ़ि लोर पहिरावा । इनै$^४$ ताजिन घोर दौराया$^५$ ॥३ रहैंसा लोर तुरी सो पावा । बचन सगुन सो इहवाँ आवा ॥४ पुरुख सोइ जो पर हिथें$^६$ जाइ । जग सुने तिन्हि करत भलाई ॥५ लोर चाँद गोबर बिसार$^१०$, अगयै$^११$ हरदी धास । ६ बरस दिवस औ कतिक मासा$^१२$ कीन्हा भोग बिलास ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—मरहमत कर्दने राव अस्तम व बर्गे दादन लोरक रा (राव सेतकका लोरकके प्रति कृपा भाव व्यक्त करना और पान देना) । इस प्रति में पंक्ति ३ और ४ के पद इस प्रति में परस्पर मिले हुए हैं । अर्थात् पदों क्रम है ३।२ और ४।१; ३।१ और ४।२ । यही क्रम ठीक भी जान पड़ता है । १—बीर । २—जाइ कें । ३—लोरक । ४—एक । ५—हने । ६— बीरवा । ७—हीं । ८—दिठै । ९—गिद्द । १०—विसारा । ११— ऐहल । १२—केतिक । टिप्पणी—(१) सेंइप राइ—हरदीपाटनके रावका नाम जान पड़ता है । पर कड़वक १०५ में उनका नाम ऐम्प प्रकट होता है । हो सकता है पाठ में