भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१८ ३९३ ( रीव्हिंग्सन २०८ ) बाज आमदने राव अज शिकार व मालूम कदन इतआम खफियते लोरक ( रावके शिकारस वापस आने पर नाईका लोरकके सम्बन्धमें बताना ) होइ अहेर राउ घर आवा । नाठ जाइ कही फुर पावा ॥१ पूछा राइ कठन यहु भवा । बस सुनाैँ तस नाउँ कहा ॥२ राठ कहा फबँ दीन्हि उतारा । ऊँच मंदिर नीक घोरसारा ॥३ रहै नर नाँखेड थियमी जानैं । अस दिनभर तस फिरति बखानै ॥४ सुन रायँ अस कीरत कीन्हा । बोर्ग जगत मदिर पैहि दीन्हा ॥५ आहि गोवर फर, लोरक नाउँ कहा जुझार ॥६ जिह कारन राठ रूपचंद मारा, ऊँहै पाँछा नार ॥७ टिप्पणी—(४) दिनभर—दिनरर, सूध । (७) कदै—वही । ३९४ ( रीव्हिंग्सन २९ : बम्बई १ ) आमदने लोरक पेशा राव सेतम ( लोरकका राव सेतमके पास आना ) खेम हुसर निसि खेलि बिहानी' । रग राती निसि पिरम कह्वानी ॥१ देइ पिछौरा राठ' जोहारा । राठ मया कै लोर हँकारा ॥२ राठ पूछहि तुम्ह कैसँ आयहु । बाट घाट कस आपन पायहु ॥३ नगर सोगोर' छोड़ि हम आये । राठ करिका मेज बुठाये ॥४ देखन पाइ राइ के आमठैँ । दयी सैंबोगैं आन पिरायठैँ ॥५ भले लोर तुम्ह आयउ इहवाँ, राखहु चित्त हमार ।६ जो कछु आह हमारैं'', सो पुनि जानु तुम्हार ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—आमदने लोरक बर रावके सेतम व सलाम कदन (लोरका राव सेतम के पास आकर जुहार करना )