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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१२२ १-हिप । २-दैहु । ३-मंदिर । ४-बिसु सुरंग । ५-कै । ६-सौंभव बात कहत न । ७-सिरजन जाइ सँवर क आवहु । तैस मनपान करावहु । ८-दोर नीन्द करैमन । ९-दूगर । १०-पुनि । टिप्पणी-(१) कम्मर-कंकड़ । (६) दाम-ताँबे का सिक्का । सिक्के के इस नाम के सम्बन्ध में सामान्य धारणा रही है कि उसे पहले पहल अकबर ने प्रवर्तित किया था । इस कारण अमीर खुसरोके खालिकबारी में 'दाम' के उल्लेखके प्रमाणसे अनेक विद्वानोंने उसे अकबरकाल अथवा उसके पश्चात्की रचना सिद्ध करनेकी चेष्टा की है । किन्तु यह नाम अकबरसे पूर्व भी प्रचलित था । इस उल्लेखके अतिरिक्त अलाउद्दीन खिलजीके दिल्ली टंकशालके टंकशाली ठक्कुर फेरूके ग्रन्थ 'द्रव्य परीक्षा' से भी 'दाम' का पूर्व अस्तित्व प्रकट होता है । द्रव्य-परीक्षाके अनुसार चाँदीका टंक ६ दामके बराबर होता था । अकबरके समयम रुपयेका मूल्य ४० दाम था । आइन अकबरीसे ज्ञात होता है कि उस समय चाँदी-सोनेके सिक्कोंके बावजूद रामदरा सारा हिसाब-किताब दामोंमें ही रखा जाता था । सो राय दाम्भ के उपर्युक्त उल्लेखसे भी यह लगता है कि दिल्ली सुलतानोंके समयम भी लेन देन और व्यवहार में दामका ही अधिक प्रचलन था । देखैहौँ-ढूँढ़ना । बरइ-पैक । ४३१ ( रीफैन्ग्यूग ३ क : बरगई ५५ ) बाज आमदने लोरक बखाना व मुतफक्किर गश्तने चाँदौ अज खबरे मैना ( लोरकका घरके भीतर आना और चाँदॉका मैनाकी बात सुन कर परेशान होना ) मैनाँ बात जा सिरखन कही । सुनत चाँद राहु जनु गही¹ ॥१ पूनेउँ जस मुख दीपत अहा । गयी सो जोति छीन² होइ रहा ॥२ जब पुरुख अपन³ घर जाइह । सिंह रासि कहँ⁴ गगन चढ़ाइह ॥३ फिर लोर मंदिर महँ आवा । कहा⁵ चाँद चित भमउ परावा ॥४ उठि पानि लै पांइ⁶ पखारहि । तुम्ह बैठ⁷ औ पीर हँकारहि⁸ ॥५