भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२५१ ४२९ ( री०क्यू० ३ १७ ) बेफियते शिकस्तगीए हाले मैना गोयद ( मैना का दुख एवं कहना ) मैल चीर सिर तेल न जानइ । यह दुख लोरक तोर पखानइ ॥१ फइत सँदेस नैन झरि पानी । बरसहि मेघ जइस घरानी ॥२ बूँदि सरै थाह न पावा । करिया नहीं तीर को लावा ॥३ मैना रूप देख का देखेउँ । अउर रूप सर्वैसार न लेखेउँ ॥४ सब एक दिन फने अहारू । फूँहि पर जियइ जानि करतारू ॥५ रोअस नित कजको मैंन, मैना बिध अस औतारी ।६ नैन मूझि भर आँसु लोरक, तें हीउर माँझ सुतारी ॥७ ४३० ( री०क्यू० ३ ७८ : बम्बई १९ ) जारी कर्दने लोरक अज शुनीदने सुखारिये मैना ( मैनाकी दुरवस्था सुन कर लोरकका रोना ) सुनि संताप मैना कर रोवा । लोरक हिये' क कसभर धोवा ॥१ अप' मैना बिनु रही न जाइ । देइ' पँख बिध जौंडै उड़ाइ ॥२ जो न जाइ मैना मुख देखउँ । तो यह जीउँ मरन लँ लेखउँ ॥३ देवस गयउँ निसि आइ तुलानी । यौभन फइत न पात' घटानी ॥४ सिरजन जाइ सीम अन्हयावहि । लँ अपनों फिइँ जेठ फरावहि ॥५ दाम लाख दोइ देउहौं, परद सहस भरावहु ।६ मोर गवन दिन इमरे, तुम फुनि गोहन आवहु ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक-शुनीदन लोरक हाले बेहाकिये मैना व गिरिया कर्दैन बा दिगरक हाल बाज नमूदन (मैना की दुरवस्था सुन कर लोरकका रोना और अपनी स्थिति कहना) ३१