चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२ मोहि कों कहा सिरजन, हरदीं संदेस तँ जाइँ ॥६ अननि छोर औ साँवरी, परी दोइ लै पाइ' ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—कैफियते गैरतजानये गुफ्तन पीछे लोरक पैगाम बेरासिनीये मैना (लोरकसे घरकी स्थिति और मैनाका सन्देश कहना) । १—ही र बनिज सुफर । २—सैर कहूँ । ३—पहुनहि सारा । ४— वहूँ । ५—देस सुख्ख । ६—कहेउँ बैठ मैं गोवर साठाथ । ७—साठाथ । ८—कहेउ तयव भौर आपन ठाउँ । —गवर क । १ —कँवल रागे धोयल जहर रची न जाइ । १०—अननि छोर आर साँवरि मैनाँ पाइ परी तै धाइ । टिप्पणी—(२) थनपारा—बैठक । तउक कै—टोकनेके लिए । पथा—साजनेवाले । (६) साँवरी—पत्नी । ४२८ (रौडंग्रहम १ र.म. ; बम्बई ४३) कधिउत गहु गहो जो तुम्ह पर यहँ बनिज अलाठाथ । मैना कहि मैं गोहन आटाथ ॥१ छाड़ि आँचर कर गहि रही । अति सुख पूरे बिरह कै दही ॥२ खोसिन' आँचर आइ छुड़ावा । कहि संदेस लोर तिहँ आवा' ॥३ महिं देखत लै पैठि फनारि । अस कहु आज मरतै काँठसारी ॥४ खोसिन घर घर करत अहा' । मैना देखु मरन कँ चहा' ॥५ बनिज छाड़ि मैं छावेउँ, मैना केर संदेस ।६ बेग आउ चलु गवर', लोरक तजु परदेस ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—कैफियते मैना गुफ्तन सिरजन बा फिराक हाल साब मयूसन (सिरजनका मैनाँकी हालत और उसकी बिरह अवस्था कहना) । (१) आँचर गहिऊ रही । २—सुएके बूड़ि । ३—लोसिन । ४— कहति करोउ जिउ पिठ आवा । —दोखिन काहूर करती अहा । —५ मरन पै चाहा । ७—यावरी । ८—तोर कण्ठु ।