भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 350, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 350

टिप्पणी—(१) पौर—ब्राह्मण । (२) बाँभन—ब्राह्मण । (३) किसहुत—कहाँ से । (५) सहदेसी—अपने देश का । (६) बरैहि—बरोनियों से मूँहा क । ४२६ ( रीडिंग्स ३ ५८ ) गुफ्तने सिरजन बर्रैरे रुजाई इसा असीशन ( सिरजनक बरवाकौक कुसल समाचार कहना ) कँवरू माइ तोर महतारी। लोग कुँटुम घर मैना नारी ॥१ तोरैं चिन्त रैन दिन आहाँहिं। नैन पसार विहि मारग चाहहिं ॥२ अन पानि चरू टेरि न भावइ। बागहि रैन दिन नीँद न आवइ ॥३ पन्थ बगाऊ पूछहिं लोरा। फोउ न कहैं सकूसर तोरा ॥४ सोक सो (मैनामॉअर) भइ। झार विरह अधिक अरि गइ ॥५ दुइ ताहि न सोफ, लोर सँ जो दई न डराइ ।६ तजफे बारि पियाहुत आपन, लीन्हा (नारि) पराइ ॥७ मूलपाठ—( ) मैना बन भैनी मॉअर म् । (७) पुरुग् (प्रमंग फ अनुसार यह पाट सर्वथा असंगत है) । ४२७ ( रीडिंग्स ३ ५६ ; बम्बई ४२ ) कजियत आवर्दने बनिज गुफ्तन सिरजन पसु लोरक ( सिरजनक लाएकय अपने बनिजकी बात कहना ) हाँ र पनिज गापरा¹ लै आयउँ। भिरव लेन कौँ² कँवरू भुलायउँ ॥१ उगेय मंदिर अहौँ बसतारा³। अड उठलें कँ भया हँकारा ॥२ पूछसि कौन पनिज तुम्ह आनौँ । कौन दसहुते कियत पयानौँ ॥३ कहा दस धँ गागरौँ आयउँ । गय माँस दाइ पुरुष चलायउँ ॥४ कहा लार नम आपन ठाँऊँ । गाबर का बाँभन मिरजन नाऊँ ॥५