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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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११८ राज पाठ तुम्ह गावरा अहँ, मैना' कर गुसाँइ ॥६ चाँदहि गगन चढ़ायहु, मना धरती काँइ ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—ताज्ये खाब नमूद्ने सिरजन बज रस्तने लोरक बजने गरीबे खुद (सिरजनको लोरकका घर बापल आनकी शुभ बड़ी दखना)। १—अरी सम्हे समे सुगर बामहु। २—बित्सों फब्बर धरम चुकाया ३—पाप पाँच वामै दिति पावा। ४—जन बित्सों चौदह तिन खावा। ५—पाठ सठ बित्सों नी बाता। ६—हारह रिसबों बिदव बगानी। ७—बर बित्सों मुन्दु बैठ न जानी। ८—तुम्ह कारह है। —मै (लिपिक व दोषत 'ना' छूट गया है। ९ —चाँदा। १०—नारी। ४२५ ( रीकण्डम् ३ २५ : बम्बई ६१ ) पुरोबने लोरक ( लोरकका सुनना ) मैना सबद पीर जो सुनावा । सुनतँ लार हियँ' घबराबा ॥१ मैना बात बाँमन कित पायहु । औ चाँदा किइ आइ सुनायहु ॥२ कहु पंडित फिर कितहुत आवा । कैँ तुम्ह' हरदींनगर पठावा ॥३ मैना नाउ कहा तुम्ह सुनौं । औ चाँदा पर कइसौ गुनौं ॥४ तूँ न इह बाँमन परदेसी । दखतँ' लखतँ आइ सहदेसी ॥५ खह पाइ खर क्षार करेहिं, आपन सीस चढ़ाठें ॥६ माइ माइ मैना कर, कुसर खुम ' खा पाठें ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—सुनीदन लोरक हाले बाकने मैना व गिरिह्याकन बा फिराक बजने मैना (लोरकका मैनाका हाल सुनकर दुःखी होना)। १—हिय। २—सुनौं और हिये। ३—पाँव। ४—औ मैना ५। —आयहु। ६—ताँ। ७—पठाबहु। ८—तूँ। —कर। १०— हालि । ११ —कसन। १२ —सह पा० तोर बाँभन अपने सीस चढ़ाठैं। १३ —मय कुठार।