चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२७ ४३९ ( री०स्म ३१४ ) तलबीदने फुरिस्तादने लोरक गुलफरोश रा बरे मैना बा गुल ( लोरकका मालीको बुलाकर फूलके साथ मैनाके पास भेजना ) दिन भा लोरफ मारी बुलाबा । गोवराँ कस हँह पासा जनाबा ॥१ अस बनि रहु धि लोर पठायउ । जो को पूछहि कहसि हाँ आयउँ ॥२ फूल फरँद भरि माली लेतस । फिर फिर गोवरा घर घर देतस ॥३ देख फूल मैनाँ तस रोई । फर मोभरहि जिंहि पिउ होई ॥४ नाँह मोर परदेमहिं छावा । फूल पान महिं देख न भावा ॥५ परकँ हार मलसि, माली साँजरि फूल ।६ पाम लागि सत मैनां, उठ मेमी अब पोल ॥७ टिप्पणी—(१) मारी—माली । ४४० ( री०स्म ३१५ ) पुरसीदन मैना खर गुल फरोश रा खबर ( मैनाका मालीसे हाल चाल पूछना ) फग्गु मर्टि पारी किंविहुत भारा । फूलबाग म भारक पारा ॥१ जानउँ पग सों राग पठारा । मपन माँज जा दगउँ आपा ॥२ लाग राम मार दिया जुड़ानों । अहग फूल दिउ गरण आनों ॥३ मार नांउ हँ मप दूर गइ । जनु गाँरन मौगहरी दाइ ॥४ गुज्र पर्द मारग हां पाटनैं । मगषी सोद कहों अच पाटउँ ॥५ हरग बिराने गउं, रैन बागर बाह ।६ दायें मागि म दिनउउँ, जा परदगी आह ॥७