चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२२ ४३७ (रौकेण्ड्स ३१२) हैब्त उफ़्तादन बर शहरे गोबर (गोबर नगरमें आतंकका बैठना) घर घर गोबरौं परा खभारू । कइहिं जासु राखइ करतारू ॥१ तरुबा कोट झराये खाई। परी रात मँह पयैर बँधाई ॥२ सोन रूप सब गोंठी फरहीं। घरहिं ओसारहिं मानुक घरहीं ॥३ मैना कँ जीठ अइस जनावा । अनौं डरहुतै मइ को आवा ॥४ छोरि लै पाट लोरक कै कङ्गा । मइ जीठ भया मावत अङ्गा ॥५ साँझ परे माइ खोलिन, मोर पिसहिं अस आइ ।६ आज रात के बीतहि, सारफ सुधि पाइ ॥७ टिप्पणी-(१) गोंठी-कथ्थी; टंट; कमरमें धन राखि रखनेका स्थान । (४) अनौं डरहुतै—यह अपपाठ जान पड़ता है। बीकानेर प्रतिमें 'इरबी हुवै जनइ को आवा' पाठ है। (६) साँझ परे—सन्ध्या बेला । ४३८ (रौकेण्ड्स ३१३) ख्वाब दीदने मैनौ अज आमदने लोरक (मैनौंका लोरकके आनेका स्वप्न देखना) गाँष कुठारैं परा अबासू । मैना कें चित अनद हुलासू ॥१ सोधन फर रात बा फूली। देख तरायौं मैना भूली ॥२ रहँस उठी चित मँह निसि जागी । पिछली रात नींद फिरि लागी ॥३ जागत नैन सपन एक आवा । मा बिहान मै गबर मसावा ॥४ खोतिन पूछहि सुतु पनि मैनों। परत साँझ जो घफविइ पैनौं ॥५ तोर मन फूल सो रँइसा, पायहुँ नीके भाइ ।६ सपन गुन गिनु मैना, कहु कछु देखतें आइ ॥७