चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३९५ देस देसन्तर तिहि संग धाये । मनसँड गँबने घर न रहाये ॥३ गरह नवइ जिंहि होइ निराबा । तुम नखोर हम चाहत पावा ॥४ हम नारि मोरैं सग आवसि । जिंहि लाये घनि अपुनैं राखसि ॥५ मगर बुध बिरस्पत, सुकर सनीचर राहु ।६ चाँद् सुरुज लै जँधषा, बारह घरिह उतराहु ॥७ ४३६ (रीडिंग्स २११ क) रवान कर्दने लोरक व चाँदा सूये गोबर (गोबरकी ओर लोरक और चाँदका रवाना होना) सुरुज दिस्टि सिंह घर गये । मीन ठाँउँ हुत अँठये मये ॥१ सवन न फरै चाँद्र क कहा । संग बैठि छोइ लागि रहा ॥२ पहर रात उठि कीन्हि पयानाँ । कोस बीस इक जाइ तुलानाँ ॥३ कोस तीस तिंह गोबराँ लागे । उतर देवहाँ लोग डरु मागे ॥४ घर घर गोबराँ बात जनाइ । फो एक राठ उतरि गा आइ ॥५ खाइ फोट सँवारहुँ बैठे कित्ते झूसार ।६ जौलहि राउ गइ होइ लागे, तौलहि लोग सँभार ॥७ टिप्पणी—(४) देवहाँ—एक नदी। प्रसगसे जान पडता है कि यह नदी गोवरके निकट ही थी। हरदी जाते समय लोर और चाँदने गंगा पार किया था। स्पष्ट है कि गंगा भी गोवरसे दूर न थी। अत' यह कहना गलत न होगा कि गंगाके आस-पास ही देवहाँ नदी भी बहती रही होगी। भारतीय सर्वे विभाग के डिप्टी सर्वेयर जनरल कर्नल यमुना नारायण सिनहाने हमें सूचित किया है कि देवहाँ नामकी नदी नैनीताल जिलेमें एक पहाडी तलहटी से निकलती है और पीलीभीत बीसलपुर, शाहजहाँपुर शाहबाद होती हुई कछीआते सात मील उत्तर गंगा में आकर गिरती है। शाहजहाँपुर तक इसका नाम देवहाँ है। उसके आगे शाहबाद तक यह देवहाँ और गरा दो नामोंसे पुकारी जाती है। शाहबाद के बाद लोग उस केवल गरा नामसे परिचित हैं। शाहबाद से ६ मील पश्चिम इस नदीके तट पर गोटा नामक स्थान भी है। गरा और गोटा दोनों ही गोवर की याद दिलाते हैं।